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यहां हाईकोर्ट के आदेश पर नहीं बनते राशन कार्ड

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बरेली। शाही नगर पंचायत में तो हाईकोर्ट के आदेश राशन कार्ड नहीं बनते, बेचारे लतीफ मियां की क्या बिसात थी। तमाम लोग हाईकोर्ट का आदेश लिए भटक रहे हैं। वहीं, जिम्मेदारों की गर्दनें फंसती देख मुफलिसी में जान गंवाने वाले लतीफ का परिवार गांव में बेहद खास हो गया है। मामला निपटाने के लिए लतीफ के घर दो दिन से रसूखदार हमदर्दों की लाइन लगी है। किसी खास के इशारे पर मोहल्ले और कस्बे के लोगों का उनके घर आना जाना लगा है।
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परिवार लतीफ के जाने से गमजदा है। वहीं, कुछ लोग शब्बू पर आगे किसी तरह की परेशानी न होने देने का दम भरते हुए सादा कागज पर दस्तखत करने या यह लिखकर देने का दबाव बना रहे हैं कि उनके अब्बू को कोई परेशानी नहीं थी। घर में न खाने की कमी थी, न पैसे की। जिससे उनकी गर्दन कार्रवाई के शिकंजे से बच सके। परेशान शब्बू ने झूठी हमदर्दी पर कई बार नाराजगी जताई। साथ ही, किसी भी कागज पर दस्तखत करने से भी साफ इनकार कर दिया। कहा, जब अब्बा जिंदा थे तो कोई हाल जानने नहीं आया। अब हिमायती बन रहे हैं। वहीं, सूत्रों का कहना है कि शाही में पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में राशन कार्ड बनाए गए। मगर जिम्मेदारों ने लतीफ को राशन कार्ड देने के लायक नहीं समझा। हालांकि, अधिशासी अधिकारी सूर्यनाथ सरोज का कहना है कि उन्होंने सभी आवेदन में संस्तुति करते हुए अपनी रिपोर्ट लगा दी थी।

नगर पंचायत की राजनीति का भी शिकार हुआ आवेदन
बताया जाता है कि लतीफ के राशन कार्ड का आवेदन नगर पंचायत की राजनीति का शिकार हो गया। उन्होंने चुनाव में जिस प्रत्याशी को सपोर्ट किया था, वह चुनाव हार गया। इसके चलते नगर पंचायत के जिम्मेदार उसके राशन कार्ड में बाधा बन रहे हैं। यही वजह रही कि मामला डीएम तक पहुंचने के बावजूद उनका राशनकार्ड नहीं बना।
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हाईकोर्ट के आदेश पर भी जारी नहीं किए राशन कार्ड
शाही में राशन कार्ड जारी करने में इतना भ्रष्टाचार है कि पात्रों को लाभ पाने के लिए हाईकोर्ट तक दौड़ लगानी पड़ रही है। मगर विभागीय अफसरों की मनमानी के आगे हाईकोर्ट के आदेश भी बेअसर हैं। शाही से सटे खजुरिया गांव की सुनीता देवी ने 20 फरवरी को राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था। बीमार लड़की को लेकर तीन मार्च को वह कमिश्नर से मिलीं थी। कमिश्नर ने खाद्य आयुक्त और पूर्ति निरीक्षक को पूरी रिपोर्ट देकर पात्र होने पर राशन जारी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सुनीता आपूर्ति कार्यालय मीरगंज के चक्कर लगाती रहीं। मायूस होकर कुछ गरीब एक समाज सेवी के पास पहुंचे। उनकी मदद से हाईकोर्ट में रिट दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए 20 मई 2019 को हाईकोर्ट ने आशा, विद्या, कुसुम रानी और मिनिबत का राशन कार्ड जारी करने का आदेश दिया था, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर भी इन गरीब पात्रों के राशन कार्ड नहीं बन सके।
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