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क्रेट में शोध प्रविधि के सवालों ने उलझाया
0 15 फीसदी अभ्यर्थियों ने छोड़ी संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा
0 इविवि, कॉलेजों में पीएचडी की 655 सीटों पर होना है प्रवेश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों में पीएचडी की 655 सीटों पर प्रवेश के लिए सोमवार को आयोजित संयुक्त स्नातक प्रवेश परीक्षा (क्रेट) 15.44 फीसदी अभ्यर्थियों ने छोड़ दी। पीएचडी की इविवि में 289 और कॉलेजों में 366 सीटें हैं। इविवि में क्रेट का आयोजन पहली बार यूजीसी रेगुलेशन 2016 के तहत किया जा रहा है, सो परीक्षा में नेट और जेआरएफ अभ्यर्थी भी शामिल हुए। परीक्षा में शोध प्रविधि यानी रिसर्च मैथोडोलॉजी से जुड़े सवालों ने अभ्यर्थियों उलझाकर रखा। पेपर हल करने के लिए अभ्यर्थियों को मिला समय कम लगा।
क्रेट में शामिल होने के लिए कुल 6671 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। इनमें से परीक्षा में 5641 अभ्यर्थी यानी 84.56 फीसदी उपस्थित रहे जबकि 1030 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। पेपर दो भागों में था और इसे हल करने के लिए अभ्यर्थियों को सुबह 11.30 से अपराह्न दो बजे (ढाई घंटे) का समय मिला था। पहले भाग में 25 सवाल शोेध प्रविधि और 25 सवाल विषय से संबंधित थे। पहले भाग में बहुविकल्पीय प्रकार के सवाल पूछे गए। प्रत्येक सवाल दो अंक के थे। 100 अंकों के पहले भाग में अभ्यर्थियों को शोध प्रविधि से जुड़े 25 सवाल काफी कठिन लगे। हिंदी, हिस्ट्री, जॉग्रफी समेत उन सभी अभ्यर्थियों को पेपर हल करने में काफी कठिनाई हुई, जिनके पाठ्यक्रम में शोध प्रविधि शामिल नहीं हे।
वहीं, शिक्षाशास्त्र, मनोविज्ञान आदि के पाठ्यक्रम में शोध प्रविधि शामिल होने से इन विषयों के अभ्यर्थियों को रिसर्च मैथोडोलॉजी के सवाल आसान लगे। दूसरा भाग कुल 200 अंकों का था। इसमें सवालों का विस्तृत जवाब देना था, जो विषय से संबंधित थे। 10-10 अंक के दस सवालों के जवाब 70-70 शब्दों में लिखने थे। वहीं, 30-30 अंकों के दो सवाल थे, जिनका उत्तर 250-250 शब्दों और 40 अकों के एक सवाल का जवाब 400 शब्दों में देना था। अभ्यर्थियों का कहना है कि पेपर हल करने के जो समय दिया गया था, वह कम लगा। हालांकि अभ्यर्थियों के लिए इतनी राहत जरूर रही कि परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं थी। परीक्षा में अनारक्षित एवं ओबीसी के लिए न्यूनतम अर्हता अंक 50 फीसदी और एससी, एसटी एवं दिव्यांग श्रेणी के लिए 45 फीसदी है। प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को इससे अधिक अंक लाने होंगे।
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अंग्रेजी शब्दों के प्रयोग से फंसे हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी
- क्रेट के लिए आवेदन करने वाले भूगोल विषय के अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान दिक्कत झेलनी पड़ी। दरअसल, पेपर हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम में था लेकिन अंग्रेजी के कई शब्दों का अनुवाद नहीं हो सका और उन शब्दों को हिंदी के पेपर में लिख दिया गया। इससे हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को दिक्कत हुई। परीक्षा समिति के निदेशक प्रो. मनमोहन कृष्ण का कहना है कि कुछ शब्द टेक्निकल थे और इनका अनुवाद मुश्किल था। हालांकि उन्होंने संबंधित से संपर्क किया था लेकिन, वहां से कहा गया कि शब्दों को ऐसे ही लिख दिया जाए।