इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की ओर से बैरवां और करनदादी गांवों में किए गए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी, न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विजय कुमार और 153 अन्य याचिकाओं पर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की ओर से बैरवां और करनदादी गांवों में किए गए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी, न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विजय कुमार और 153 अन्य याचिकाओं पर दिया है।
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मामला भूमि अधिग्रहण अधिनियम-1894 के तहत वर्ष 2000 में शुरू हुई अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा है। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी वाराणसी ने 10 जनवरी 2024 को शेष भूमि के लिए अवार्ड पारित किया था। याचियों का कहना था कि मुआवजा 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार तय होना चाहिए था। बाजार मूल्य एक जनवरी 2014 के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कब्जा लेने से पहले अनुमानित मुआवजे का 80 प्रतिशत जमा नहीं किया गया। अधिग्रहीत भूमि का इस्तेमाल निर्धारित ट्रांसपोर्ट नगर उद्देश्य के बजाय निजी संस्थाओं को व्यावसायिक दरों पर बेचने में किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित अवार्ड 20 सितंबर 2012 के पूर्व अवार्ड को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली एयरटेक सर्विसेज फैसले के अनुरूप पारित किया गया है। अदालत ने पाया कि मुआवजा जमा हो चुका था और वर्ष 2003 में कब्जा भी लिया जा चुका था। ऐसे में अधिग्रहण समाप्त होने का सवाल नहीं उठता।