पॉवर ग्रिड को हर माह दे रहे दो लाख की बिजली
0 ट्रिपलआईटी में लगे 940 सोलर पैनलों से हो रहा उत्पादन
डॉ. अखिलेश मिश्र
इलाहाबाद।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में नवंबर-दिसंबर में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र से हर महीने दो लाख रुपये की बिजली का उत्पादन हो रहा है। दो ब्वॉयज हॉस्टलों की छत पर लगे 940 सोलर पैनलों से हर महीने 300 किलोवाट बिजली मिलती है। यह बिजली सीधे नेशनल ग्रिड कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्र को ट्रांसफर की जा रही है।
राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किए जाने के बाद ट्रिपलआईटी सौर ऊर्जा का उत्पादन शुरू करके देश के प्रमुख संस्थानों में शामिल हो गया है। संस्थान के निदेशक प्रो. पी नागभूषण ने बताया कि 300 किलोवाट के संयंत्र को पावर ग्रिड से सीधे जोड़ा गया है। ब्वॉयज हॉस्टल की छत पर 940 सोलर पैनल और 10 इनवर्टर लगाए गए हैं। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में यह मिशन ऊर्जा मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से संयुक्त रूप से शुरू किया गया है। सोलर संयंत्र की स्थापना के बाद संस्थान पूरी तरह से ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गया है। आने वाले दिनों में संस्थान अपनी बिजली के दम पर कैंपस को चमकाएगा। साथ ही सौर ऊर्जा का उत्पादन और बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
2022 तक एक लाख मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य
0 संस्थान के इलेक्ट्रानिक्स विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपना देश बीते दो से तीन वर्ष में विश्व के सर्वश्रेष्ठ देशों में शामिल हो गया है। केंद्र सरकार ने 2015 में सौर ऊर्जा के उत्पादन को अपने विशेष एजेंडे में शामिल किया। इससे पहले की मनमोहन सिंह सरकार ने 2022 तक 20 हजार मेगावाट के सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा था। 2015 में नरेंद्र मोदी सरकार ने इस लक्ष्य को पांच गुना बढ़ाकर एक लाख मेगावाट कर दिया। सरकार के इस कदम के बाद तमिलनाडु में मदुरई में 600 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया। यह संयंत्र अमेरिका के कैलीफोर्निया में स्थापित टोपाज संयंत्र से भी बड़ा था। इसके बाद जोधपुर में भाडला सौर ऊर्जा संयंत्र पर काम शुरू किया, इसकी क्षमता 2255 मेगावाट होगी। इस संयंत्र की एक यूनिट ने काम करना शुरू कर दिया है।
संयंत्र की स्थापना में मिली 53 लाख की सब्सिडी
300 किलोवाट के सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना में संस्थान को कुल दो करोड़, 18 लाख 70 हजार रुपये खर्च करने पड़े हैं। इसमें भारत सरकार की ओर से 53 लाख, 54 हजार 820 रुपये सब्सिडी मिली है। इस प्रकार संस्थान को संयंत्र की स्थापना में कुल एक करोड़, 65 लाख 15 हजार 180 रुपये खर्च करने पड़े हैं।