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जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता को हो निर्धारण: सांसद श्यामा चरण

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जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता का हो निर्धारण
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केपी इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्यों की शैक्षिक कार्यशाला में बोले सांसद श्यामा चरण
कहा, शिक्षा का कायाकल्प समय की जरूरत, प्रधानाचार्य बनाएं ठोस रणनीति

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
शिक्षा में बदलाव के लिए जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता का भी निर्धारण किया जाना जरूरी है। जब शिक्षाविद ही शिक्षा मंत्री बनेंगे तो शिक्षा का उन्नयन हो सकता है। ये बातें सोमवार को केपी इंटर कॉलेज में आयोजित प्रधानाचार्यों की शैक्षिक कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि सांसद श्यामा चरण गुप्त ने कहीं। इसमें जिले भर के विद्यालयों के प्रधानाचार्य शामिल हुए।
सांसद ने कहा कि राजनीति में बगैर योग्यता वाले लोग पद धारण करेंगे तो लोकतंत्र विफल हो जाएगा। कहा कि शिक्षा का कायाकल्प समय की जरूरत है। इसके लिए प्रधानाचार्यों को दक्षता संवर्द्धन कार्यशाला में ठोस रणनीति बनानी होगी। केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह ने प्रधानाचार्यों से विद्यालयों में संस्कारयुक्त शिक्षा के लिए उचित वातावरण के सृजन पर बल दिया। जिला पंचायत सदस्य बबिता सिंह पटेल ने युगानुकूल शिक्षा की जरूरत बताई। पूर्व अपर शिक्षा निदेशक डॉ.सुधा प्रकाश ने प्रधानाचार्यों की शैक्षिक एवं प्रशासनिक भूमिका, शिक्षा निदेशालय के सीएफओ आत्म प्रकाश धर द्विवेदी तथा डीआईओएस कार्यालय की सीएफओ पायल सिंह ने वित्तीय प्रबंधन एवं जीपीएफ निस्तारण, पूर्व प्रधानाचार्य बीएन तिवारी माध्यमिक शिक्षा अधिनियम की जानकारी दी।
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इस मौके पर राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कार्यालय प्रबंधन एवं अभिलेखीकरण पर तकनीकी एवं विधिक जानकारी दी। इसमें सह शिक्षा निदेशक सत्य नारायण चौरसिया ने भी विभिन्न विषयों पर जानकारी दी। समापन समारोह में मुख्य अतिथि एमएलसी डॉ. यज्ञ दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानाचार्यों के लिए विभागीय नियमों की जानकारी जरूरी है। उन्होंने एक्ट के विभिन्न धाराओं के प्रावधानों को भी बताया। अध्यक्षता कर रहे विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक एवं प्रधानाचार्य एक दूसरे के पूरक हैं। विद्यालय के संचालन के लिए दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके पहले समन्वयक अरुण कुमार त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया। विषय प्रवर्तन सह संयोजक डॉ. मुरारीजी त्रिपाठी एवं स्वागत संयोजक डॉ.योगेंद्र सिंह ने किया। कार्यशाला में अनय प्रताप सिंह, मदन मोहन शंखधर, दीपक पांडेय, आनंद शुक्ला, लालमणि मिश्र, डॉ.लवकुश सिंह, सुयोग पांडेय, ऋषिदेव त्रिपाठी, मिथिलेश कुमार शुक्ला, संदीप सिंह राठौर, रश्मि अग्रवाल आदि प्रधानाचार्य शामिल हुए।
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