सुबूत नष्ट होने के बाद कठिन होगी सीबीआई जांच
0 पूर्व में कॉपियों की जांच से ही सामने आए थे गड़बड़ी के मामले
0 यूपीपीएससी नष्ट कर चुका है कई पीसीएस परीक्षाओं की कॉपियां
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्तियों की जांच सीबीआई के लिए आसान नहीं होगी। अब तक सबसे अधिक गड़बड़ी के आरोप पीसीएस परीक्षाओं में लगाए गए हैं। पिछली तमाम परीक्षाओं की कॉपियां आयोग नष्ट कर चुका है जबकि प्रतियोगी कॉपियों में ही गड़बड़ी के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि कई दूसरे मामलों में भी आयोग पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं लेकिन प्रमुख रूप से जांच कॉपियों पर ही टिकी है।
कॉपियों में गड़बड़ी का ताजा उदाहरण पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 है, जब एक महिला अभ्यर्थी की कॉपी पर कोड नंबर बदल दिया गया और वह मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गई। मामले में जब महिला अभ्यर्थी ने आपत्ति जताई और उसकी कॉपी की जांच की गई तो पता चला कि कॉॅपी का कोड नंबर ही बदल दिया गया था। हालांकि आयोग ने इस मामले में कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की और महिला अभ्यर्थी को भी मुख्य परीक्षा में सफल घोषित किया गया। इसी तरह एक अभ्यर्थी ने जनसूचना अधिकार के तहत पीसीएस परीक्षा-2012 की कॉपी देखने के लिए आयोग में आवेदन किया तो उसे बताया गया कि पीसीएस परीक्षा-2012 की कॉपियां नष्ट की जा चुकी हैं।
इससे पूर्व के वर्षों में हुई पीसीएस परीक्षा की कॉपियों को भी आयोग नष्ट कर चुका है। पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में कोड नंबर के हेरफेर से जुड़ा मामला तभी खुला, जब कॉपी की जांच की गई। ऐसे में जिन परीक्षाओं की कॉपियां नष्ट की जा चुकी हैं और उन परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, वहां हुई धांधली का खुलासा कर पाना सीबीआई के लिए आसान नहीं होगा। अभ्यर्थी भी लगातार मांग कर रहे हैं कि जांच तत्काल शुरू कराई जाए। आयोग में बैठे पुराने कर्मचारी और पदाधिकारी सुबूतों से किसी तरह की छेड़छाड़ करें, इससे पहले जांच शुरू करा दी जाए। हालांकि गड़बड़ी के आरोप सिर्फ कॉपियों को लेकर ही नहीं लगाए गए हैं, केंद्र निर्धारण, स्केलिंग में भी अनियमितता के आरोप हैं। पेपर आउट होने के मामलों में भी आयोग कटघरे में खड़ा है। ये तमाम मामले भी सीबीआई जांच के दायरे में होंगे।