माघ मेले की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में अधिकांश काम पूरे होने का दावा किया गया है। मेला कार्यों से जुड़े विभागों के अफसरों ने डीएम को इस संबंध में जानकारी दी। हालांकि, सभी विभागों की ओर से कुछ न कुछ कार्य कराए जा रहे हैं। चकर्ड प्लेटें भी पूरी तरह से नहीं बिछ सकी हैं। स्वास्थ्य विभाग का काम तो सबसे पीछे है। संत और संस्थाएं भी आए दिन सुविधाओं को लेकर हंगामा कर रही हैं।
समीक्षा बैठक के दौरान डीएम सुहास एलवाई ने पत्रकारों को बताया कि माघ मेला के लिए शासन को 51 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव भेजा गया था। फिलहाल शासन ने 40 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसमें से 23 करोड़ का जारी हो चुके हैं। डीएम ने कहा कि सभी विभागों को कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने की सख्त चेतावनी दी गई है। यदि कार्यों में किसी प्रकार की शिकायत मिली तो भुगतान रोक दिया जाएगा। डीएम ने कहा कि अबकी बार माघ मेले में भूले-भटके शिविर को अपडेट किया जाएगा। मेले से पहले शहर में कोई ऐसा नया काम नहीं होगा, जिससे आवागमन बाधित हो। कहा जिन क्षेत्रों में काम चल रहे हैं, उन्हें मेला शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा करने का सख्त निर्देश संबंधित विभाग को दे दिया गया है।
समीक्षा के दौरान पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने बताया कि मेला क्षेत्र में यातायात सुगम करने केलिए 70.382 किमी चकर्ड प्लेट की सड़क बनाई जा रही है। इसमें 95 फीसदी काम पूरा हो गया है। डीएम ने शेष काम 24 घंटे में पूरे करने का निर्देश दिया। जल निगम के अधिकारियों ने डीएम को जानकारी दी कि पेयजल के लिए 145 किमी के सापेक्ष 93 फीसदी पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है। मेले में जलापूर्ति के लिए 16 नलकूपों में से 14 को चालू कर दिया गया है। डीएम ने अधूरे काम को 23 दिसंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया।
डीएम ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेला अवधि में गंगा-यमुना को प्रदूषण मुक्त रखा जाए। नदी में सीधे बहने वाले 23 नालों के पानी की टैपिंग एवं जैविक विधि से शोधन कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि नालों की टैपिंग एवं जैविक विधि से शोधन के कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही नही होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अभियंताओं ने डीएम को बताया कि मेला क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था के लिए 9500 विद्युत पोल के सापेक्ष 98 फीसदी पोल लग गए हैं। वहीं 346 किमी के सापेक्ष 90 फीसदी एलटी लाइन का काम भी पूरा हो गया है। मेले में बिना किसी बाधा के विद्युत आपूर्ति होती रहे, इसके लिए 19 सब स्टेशनों में से 18 की स्थापना की जा चुकी है। मेले में 90 फीसदी स्ट्रीट लाइट का काम पूरा हो गया है। आकस्मिक विद्युत कटौती के समय मुख्य मार्गों पर पर प्रकाश व्यवस्था बनाए रखने हेतु छह सब स्टेशनों पर जनरेटर की व्यवस्था की गई है, इसमें पांच जनरेटर लगाए जा चुके हैं। डीएम ने बिजली विभाग के अधिकारियों को समय से काम पूरा करने का निर्देश दिया।
डीएम ने मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा करने के बाद बताया कि 20-20 बेड के दो चिकित्सालयों के सापेक्ष एक चिकित्सालय एवं दस प्राथमिक उपचार केंद्र के सापेक्ष दो प्राथमिक उपचार केंद्र की स्थापना की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे मेला क्षेत्र में 11 हजार पीआरएआई टाइप शौचालयों का निर्माण किया जाना है। इसका काम अभी पीछे चल रहा है। पांच हजार जन शौचालयों के सापेक्ष मात्र 1430 जन शौचालयों की स्थापना हो सकी है। इसके साथ 200 जीरो डिस्चार्ज टायलेट, 16 मोबाइल टायलेट एवं 50 वाटरलेस युरिनल्स बनाए जाने हैं। मेले में पहली बार सफाईकर्मियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक से ली लाएगी। एलोपैथिक दवाइयों के लिए तीन आयुर्वेदिक चिकित्सालयों एवं तीन होम्योपैथिक चिकित्सालयों की स्थापना भी मेला क्षेत्र में की गई है। डीएम ने चिकित्साधिकारी को शेष कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।
डीएम ने बाढ़ कार्य खंड के अधिकारियों को गंगा नदी मे हो रहे कटान पर सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने कटान रोकने के लिए मानीटरिंग करने की बात कही। गंगा में पर्याप्त जल की व्यवस्था के लिए माघ मेले में प्रतिदिन टिहरी से एक हजार क्यूसेक एवं नरौरा से चार हजार क्यूसेक अतिरिक्त जल छोड़ने की बात कही। डीएम ने खाद्य एवं आपूर्ति, पुलिस विभाग एवं मेला प्रशासन के कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यों को तय समयसीमा मे गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय समीक्षा के बाद मेले का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान वह साधु-संतों से मिले और उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। कहा कि मेले के दौरान साधु-संतों के कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।