छात्रनिधि के दुरुपयोग पर लौटाए कॉलेजों के प्रस्ताव
प्रमाण और अभिलेखों के साथ पुन: भेजना होगा प्रस्ताव
उच्च शिक्षा निदेशक ने महाविद्यालयों को जारी किया पत्र
इलाहाबाद। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में छात्रनिधि के दुरुपयोग के कई मामले सामने आने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने सख्त तेवर अपनाए हैं। महाविद्यालयों की ओर से छात्रनिधि से कराए जाने वाले कार्यों से संबंधित प्रस्ताव उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजे गए थे लेकिन प्रस्ताव में ऐसे कार्यों का शामिल कर लिया गया था, जो छात्रनिधि से नहीं कराए जा सकते हैं। इस पर उच्च शिक्षा निदेशक ने प्रस्ताव लौटाते हुए प्रमाणों और अभिलेखों के साथ नए सिरे से प्रस्ताव भेजने को कहा है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. प्रीति गौतम की ओर से महाविद्यालयों के प्रबंधकों, सचिवों, प्राधिकृत नियंत्रकों और प्राचार्यों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में छात्रनिधियों की बचतों से छात्र कल्याणकारी कार्यों के नाम पर व्यय किए जाने के लिए उच्च श्क्षिा निदेशक से पूर्व अनुमति ली जाती है। इसके लिए कई महाविद्यालयों की ओर से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उनका परीक्षण करने पर यह बात सामने आई है कि प्रस्ताव में जिन कार्यों का उल्लेख किया गया है, छात्रनिधियों की बचतों से उनपर खर्च किया जाना नियम विरुद्ध है।
छात्र-छात्राओं से लिए जाने वाले क्रीड़ा शुल्क, पत्रिका शुल्क, परिचय पत्र शुल्क, अध्ययन कक्ष शुल्क, वार्षिक दिवस शुल्क, छात्रसंघ शुल्क, प्राथमिक चिकित्सा शुल्क, काशनमनी शुल्क औरर निदेशक उच्च शिक्षा की ओर से घोषित किसी अन्य शुल्क को भी छात्रनिधि की श्रेणी में मान्य किया गया है। इन कोषों की बचत की राशि को खेल के मैदान की जमीन खरीदने, व्यायामशाला के निर्माण, स्टेडियम के निर्माण, पानी की व्यवस्था एवं छात्रों के लिए अन्य कल्याणकारी कार्यों पर खर्च किया जा सकता है लेकिन जो प्रस्ताव आए, उनमें इन कार्यों से इतर ऐसे मदों पर खर्च की अनुमति मांगी गई जिन छात्र कल्याण से कोई मतलब नहीं। वाहन खरीदने, भ्रमण आदि पर यह राशि खर्च नहीं की जा सकती।
उच्च शिक्षा निदेशक ने पत्र में कहा है कि विभिन्न छात्रकोषों की विगत तीन वर्षों से चली आ रही बचतों अथवा ब्याज की धनराशि से छात्र कल्याणकारी कार्यों के व्यय का प्रस्ताव प्रमाणों एवं अभिलेखों के साथ प्रस्तुत किया जाए। बिना पूर्व अनुमति छात्रकोषों की धनराशि का व्यय न किया जाए। इसके अलावा जिन महाविद्यालयों की ओर से प्रतिमानों के अनुरूप प्रस्ताव नहीं भेजे गए हैं, उन पर कोई विचार नहीं होगा। संबंधित महाविद्यालयों को प्रतिमानों के अनुसार प्रस्ताव पुन: भेजने को कहा गया है।