500 से ज्यादा रेल इंजनों में लगाई फॉग डिवाइस
0 सुरक्षित सफर के लिए कम स्पीड है जरूरी
0 ड्राइवरों को 500 मीटर पहले ही दिख जा रहे हैं सिगनल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। कोहरे के दौरान ट्रेनों की लेट लतीफी कम करने के लिए उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) द्वारा अपने 500 से ज्यादा इंजनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाई है। डिवाइस लगने से सबसे ज्यादा सहूलियत चालकों को हुई है। डिवाइस लगने से घने कोहरे में भी चालकों को 500 मीटर पहले ही सिगनल की जानकारी मिल जा रही है। एनसीआर के साथ उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे ने भी अपने तमाम इंजनों में इस तरह की डिवाइस लगाई है।
कोहरे के दौरान सुरक्षित सफर के लिए ये डिवाइस कितनी कारगर सिद्ध होगी इसके लिए रेलवे अफसर भी लगातार मानीटरिंग कर रहे हैं। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बंसल के मुताबिक डिवाइस की मदद से लोको पॉयलटों को घने कोहरे में भी 500 मीटर पहले ही सिगनल की जानकारी मिल जा रही है। कोहरे में ट्रेन लेट होने के मामले में सीपीआरओ ने बताया कि सुरक्षित सफर के लिए कम स्पीड जरूरी है। इलाहाबाद-दिल्ली रूट के जिन रेलखंडों पर मॉडीफाइड सिगनल है वहां ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 60 किमी प्रतिघंटा ही रखने को कहा गया है। इसके अलावा ऑटोमेटिक सिगनलिंग में ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 40 किमी प्रतिघंटा ही रखी गई है। लोको पॉयलटों इससे कम स्पीड में भी ट्रेन चला सकते हैं। इसी वजह से ट्रेन कुछ लेट चल रही है। रेलवे की प्राथमिकता यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाना है। अभी तक फॉग डिवाइस न होने की वजह से लोको पायलटों को कोहरे के दौरान सिगनल देखने में दिक्कत होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सड़क के मुकाबले कोहरे में रेल का सफर बेहद सुरक्षित है। रेलवे द्वारा कोहरे से निपटने के लिए किए जा रहे तमाम उपायों की वजह बीते कुछ वर्ष के दौरान एक भी रेल हादसे नहीं हुए हैं।