करोड़ों का जमीन घोटाला
जांच एजेंसी बदलवाने के पीछे बड़ा खेल
- वादी और याची दोनों ने ही नहीं की है जांच एजेंसी बदलने की मांग
- आमतौर पर मांग पर ही बदली जाती है जांच एजेंसियां
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। झूंसी में करोड़ों के रेलवे जमीन घोटाले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाला याची ने लिखकर दिया है कि वह नहीं चाहते की मामले की जांच स्थानांतरित हो। यही नहीं वादी ने भी कुछ इसी तरह का बयान जांच टीम को दिया है। आमतौर पर वादी की मांग पर ही जांच एजेंसियों को बदला जाता रहा है। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि जब याची और वादी जांच स्थानांतरित करने की मांग नहीं कर रहे हैं तब आखिर क्यों सरकार मामले को सीबीसीआईडी के पास भेजना चाहती है। मामले को स्थानांरित कराने के लिए जिले के भाजपा विधायकों ने शासन को पत्र भेजा है लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे की कहानी कुछ और है।
हाल ही में जिले में तैनात तीन विधायकों ने शासन को पत्र भेजकर मामला किसी अन्य जांच एजेंसी को स्थानांतरित करने की मांग की थी। जिसके बाद एसएसपी की ओर से भी एनओसी देकर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण की खास बात यह है कि मामले में वादी और याची की ओर से उच्चाधिकारियों को लिखित में दिया गया है कि वह नहीं चाहते हैं कि जांच स्थानांतरित हों।
‘सुप्रीम कोर्ट तक ले जाऊंगा लड़ाई’
इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाले भाजपा काशी प्रांत के उपाध्यक्ष दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने भी बताया कि वह नहीं चाहते कि मामले की जांच किसी अन्य एजेंसी को दी जाए। दिवाकर ने बताया कि उनकी जनहित याचिका पर एक फरवरी को कोर्ट ने आदेशित किया था कि याची चार हफ्ते के भीतर उसके पास मौजूद मामले से संबंधित तथ्यों, सूचना को जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें। अभी वह अवधि पूरी भी नहीं हुई कि मामला स्थानांतरित कराने की साजिश रची जाने लगी। दिवाकर का कहना है कि जांच एजेंसी बदले जाने पर वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।