वित्त विहीन विद्यालयों को शामिल किए बिना आसान नहीं परीक्षा
0 माध्यमिक शिक्षा परिषद वर्ष 2018 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी में जुटा
0 सरकार ने राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही केंद्र बनाने का जारी किया है फरमान
0 ऐसे ज्यादातर विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव, वित्त विहीन में पर्याप्त सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। माध्यमिक शिक्षा परीक्षा ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए केंद्रों का ऑनलाइन निर्धारण तथा राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को ही प्राथमिकता देने की तैयारी की हो लेकिन बिना वित्त विहीन विद्यालयों को शामिल किए परीक्षा कराना आसान नहीं है। ऐसा इसलिए कि सरकार ने जिन राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने में प्राथमिकता देने को कहा हैं, उनमें से ज्यादातर में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। इसकी अपेक्षा वित्त विहीन विद्यालयों में पर्याप्त सुविधाएं हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्र तय करने के लिए वित्त विहीन विद्यालयों को किनारे करना सरकार के लिए इतना आसान भी नहीं है। यूपी बोर्ड के अफसर भी इससे इंकार नहीं करते लेकिन इस संबंध में कुछ बोलने से बच रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा को नकलविहीन कराने की तैयारी की है। इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्र निर्धारण नीति तैयार की गई है। प्रदेश में तकरीबन 45 सौ राजकीय, 25 हजार सहायता प्राप्त एवं 35 हजार के आसपास वित्त विहीन विद्यालय हैं। परीक्षा केंद्र के लिए करीब 25 हजार विद्यालयों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। पूरे प्रदेश में लगभग नौ हजार केंद्र बनाए जाने हैं। सरकार ने सीसीटीवी कैमरे समेत, पक्की छत वाले कक्षों एवं उनमें पर्याप्त फर्नीचर, चहारदीवारी, गेट, विद्युत, पेयजल एवं शौचालय व्यवस्था, पहुंच मार्ग आदि वाले राजकीय एवं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को ही केंद्र बनाने को कहा गया है।
यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को इसी के आधार पर परीक्षा केंद्रों का ऑनलाइन निरीक्षण करने का निर्देश दिया है लेकिन नई नीति के तहत शिक्षा विभाग के अफसरों के सामने केंद्रों का निर्धारण करने में समस्या आ रही है। ऐसा इसलिए कि शहर के बाहरी इलाकों में राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में काफी ऐसे हैं, जिनमें पूरी चहारदीवारी या फिर मुख्य गेट नहीं है। ऐसे भी विद्यालय हैं जिनमें पक्की छत और पर्याप्त फर्नीचर नहीं है या बिजली की समस्या है, जबकि ज्यादातर वित्त विहीन विद्यालयों की इमारतें हाल के वर्षों में बनी हैं। जहां तकरीबन सभी सुविधाएं हैं। शिक्षा विभाग के बड़े अफसर भी माने रहे हैं कि बिना वित्त विहीन विद्यालयों को शामिल किए केंद्रों का निर्धारण करना आसान नहीं है लेकिन फरमान सरकार है सो वह कुछ बोलने से भी बच रहे है।
00
नकल के लिए बदनाम हैं वित्त विहीन विद्यालय
इलाहाबाद। माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त ज्यादातर वित्त विहीन विद्यालय नकल के लिए बदनाम हैं। प्रदेश भर में काफी ऐसे वित्त विहीन विद्यालय हैं, जो पहुंच वाले लोगों के हैं या फिर उससे किसी नेता का नाम जुड़ा है। इन विद्यालयों में शिक्षा माफिया नकल कराने के लिए बकाया ठेका लेते हैं। इसी वजह सरकार ने वर्ष 2018 की परीक्षा केंद्र के रूप में वित्त विहीन के बजाए राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को प्राथमिकता देने के लिए कहा है।