दिन चढ़ते ही शुरू हो जाती है ‘अंधेरगर्दी’
क्रासर
नए यमुना पुल पर पुलिस और टोल कर्मियों की वसूली के चलते घंटों में तय होता है मिनटों का सफर
नो इंट्री के बावजूद भारी वाहनों को छूट, सड़क की दोनों लेन भी पैसे बेच दी जाती है
दोपहिया वाहनों की लेन से भारी वाहनों को गुजारते हैं टोल कर्मी, टोका तो मारपीट पर उतारू
इलाहाबाद।
नए यमुना पुल के निर्माण के बाद माना गया था कि इससे न सिर्फ यमुनापार के इलाकों का विकास होगा, बल्कि लाखों की आबादी को रोज-रोज के जाम से छुटकारा भी मिलेगा। लेकिन, पुलिस और टोल प्लाजा कर्मियों की वसूली के चलते आज हालात ऐसे हैं कि शहर से नैनी तक की दूरी तय करने में ही घंटों लग जाते हैं। यमुना पुल ट्रकों और बसों का अवैध स्टैंड बन चुका है। पुल की दोनों लेन पर स्थायी तौर पर ट्रकें खड़ी रहती हैं। इसके अलावा अलोपीबाग फ्लाईओर के नीचे और नैनी में जेल रोड पर भी ट्रक चालकों का ही कब्जा है। यही कारण है कि बैरहना से शुरू होकर यह जाम रीवा रोड पर घूरपुर के आगे तक जाता है, जबकि नैनी में करछना तक। हालात शाम के बाद से ज्यादा बदतर होते हैं। लेप्रोसी मिशन चौराहे को क्रास करने में ही आधे घंटे से ज्यादा का वक्त लग जाता है। कारण, सड़क पर बेतरतीब ढंग से खड़े वाहन, और नो इंट्री के बावजूद भारी वाहनों को शहर में आने की छूट देना। सिर्फ झूंसी की तरफ जाने वाले वाहनों को ही इंट्री का प्रावधान है, मगर पुलिस कर्मियों की वसूली के चलते रीवा और मिर्जापुर की ओर से आने वाले ट्रकों को भी शहर में प्रवेश मिल जाता है।
कोट
शहर में वाहनों से वसूली पर सख्ती से रोक लगाई गई है। नो इंट्री के नियम को अगर कहीं तोड़ा जा रहा है और ट्रकों से वसूली की जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।-आकाश कुलहरि,एसएसपी ।
ट्रकों को इंट्री, पब्लिक को नो इंट्री
शहर में रात दस बजे से सुबह सात बजे तक ही भारी वाहनों के प्रवेश को मंजूरी मिली है। मगर, होता इसके उलट है। ट्रकों की आवाजाही चौबीस घंटे रहती है। झूंसी की तरफ जाने वाले वाहनों को जरूर छूट है, लेकिन पुलिसकर्मी ट्रक चालकों से वसूली कर इन्हें जाने देते हैं। यह वसूली भी कई नाकों पर होती है। इसमें लेप्रोस मिशन चौराहा अहम पड़ाव है। ट्रकों के लिए चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मी आम लोगों की आवाजाही रोक देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि बैरहना की ओर अलोपीबाग तक और नैनी में कॉटन मिल तिराहे तक बाइक से निकलना भी दूभर हो जाता है। अगर कोई इस पर आपत्ति जताता है तो चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मी आम नागरिकों को ही धमकाते मिल जाएंगे।
टोल प्लाजा कर्मियों की गुंडागर्दी
कुछ टोल कर्मी भी इस अव्यवस्था में बराबर के साझीदार हैं। टोल प्लाजा के पास पुल की दोनों लेन इन्हीं कर्मियों की मेहरबानी के चलते स्थायी स्टैंड बन चुकी हैं। ट्रक चालकों से इनकी वसूली निर्धारित है। इसे अदा कर कोई भी ट्रक चालक जब तक चाहे सड़क पर ट्रक खड़ी कर सकता है। इसके अलावा टोल प्लाजा से गुजरने के दौरान पहले भारी वाहनों को ही प्राथमिकता दी जाती है। कहने को तो टोल प्लाजा से गुजरने के लिए बाइक चालकों के लिए अलग लेन है, लेकिन यह व्यवस्था भी वसूली की भेंट चढ़ चुकी है। इस लेन पर भी भारी वाहनों का ही कब्जा रहता है। अगर कोई आपत्ति करे तो टोल कर्मी मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।
पैसे दो, इंट्री लो
नए पुल पर रात गहराते ही अंधेरगर्दी का दौर शुरू हो जाता है। पुल की दोनों लेन पर ट्रकों की तीन-तीन लाइनें बन जाती हैं। ऐसे में बाइक सवार तो क्या, पैदल भी नहीं निकला जा सकता। टोल प्लाजा पर दस कदम की दूरी तय कर लेना भी जानेलवा ही है। सभी पर भारी वाहन खड़े रहते हैं। वैसे तो टोल टैक्स लेने के लिए विंडो बनी हैं, मगर दोपहिया की लेन से गुजरने वाले भारी वाहनों को कुछ टोल कर्मी विशेष सुविधा मुहैया कराते हैं। उनसे पैसे लेकर रसीद मुहैया कराई जाती है। जबकि पीछे खड़े दोपहिया चालकों को तक गुजरने से रोक दिया जाता है। इसके आगे लेप्रोसी मिशन चौराहा भी वसूली का अहम अड्डा है। चारों तरफ से आने वाले भारी वाहनों से वसूली में पुलिस कर्मी इतने व्यस्त रहते हैं कि जाम की उन्हें परवाह ही नहीं रहती।
किसी की जान जाए, इन्हें क्या
अक्सर नैनी और रीवा की ओर से आने वाले गंभीर मरीजों को लेकर कोई न कोई एंबुलेंस जाम में फंसी रहती है, लेकिन कोई पुलिसकर्मी मदद के लिए आगे नहीं बढ़ता। जेल रोड की दोनों लेन पर ट्रकों की तीन से चार लाइनें बन जाती हैं। ऐसे में कोई निकले भी तो कैसे। रात भर अराजकता का यही माहौल बना रहता है। मरीज की किस्मत अच्छी रही तो जाम से निकल पाए, नहीं तो भगवान ही मालिक।
पुलिस की जेब गरम कीजिए और बीच सड़क लगाइए दुकान
नए पुल के बैरहना छोर पर पुलिसकर्मी वसूली के लिए दिन ढलने का भी इंतजार नहीं करते। यहां यह काम सुबह से ही शुरू हो जाता है। पुल पर पैदल जाने वालों के लिए अलग लेन बनी है, मगर पुलिसकर्मियों ने अपनी जेबें गरम कर इस पर दुकानें लगवा दी हैं। इसके अलवा आधी सड़क से ज्यादा पर प्राइवेट बस चालक कब्जा किए रहते हैं। बाकी जगह टेंपो वाले घेर लेते हैं। यह सबकुछ वहां मौजूद पुलिसवालों की आंखों के सामने होता है, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।