उत्कर्ष ने जब नोट चेक किए तो उसे कुछ शक हुआ। शक होने पर उसने अपने पड़ोसी टेलीकॉम सेंटर संचालक दीपक को फोन कर अंदर बुला लिया। उसने भी नोट देखे तो उसमें महात्मा गांधी का फोटो व तार असली नोटों की तरह स्पष्ट नहीं थे। उलट पलटकर देखने पर रंग बदल रहा था। इस पर नोट लेकर आए युवक को वहीं दबोच लिया गया। बाहर खड़ा उसका साथी यह देख बाइक छोड़कर भाग गया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई।
पूछताछ में उसने खुद का परिचय कासगंज के गंजडुंडवारा क्षेत्र के गांव गणेशपुर बाग के जिकरुल हसन के रूप में दिया। साथ में देहली गेट में अपनी ससुराल होना बताया। तलाशी में उसके पास कुल 2.17 लाख कीमत के 500-500 के 434 नकली नोट मिले। इस मामले में पुलिस ने दुकानदार दीपक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया है। इसमें जिकरुल व उसके साथी को आरोपी बनाया है। आरोपी से थाना पुलिस की सूचना पर एटीएस व इंटेलीजेंस टीमों ने भी पूछताछ की है। देर रात तक उससे जुड़े नेटवर्क को खंगालने का प्रयास जारी था। सीओ प्रथम मयंक पाठक बताते हैं कि आरोपी अब तक की जांच में पश्चिम बंगाल नेटवर्क से जुड़ा लग रहा है। जांच व पूछताछ जारी है। रविवार तक काफी कुछ स्पष्ट किया जा सकेगा।
पहले भी गया जेल, मालदा के जरिये आए नोट
पकड़े गए आरोपी ने जो क्यूआर कोड दुकानदार को रुपये ट्रांसफर करने के लिए दिया था, वह मालदा के अब्दुल रहमान नाम के व्यक्ति का है। इसी से स्पष्ट हुआ कि आरोपी पश्चिम बंगाल से मालदा के जरिये भारत आ रही नकली करेंसी नेटवर्क से जुड़ा है। एटीएस जांच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपी पहले जेल गया है। यह नेटवर्क मालदा से ट्रेन के रास्ते यूपी व दिल्ली तक नकली नोट की तस्करी का धंधा करता है। अलीगढ़ सहित आसपास के जिलों में पशु बाजार व गांव में लगने वाले बाजारों में ये नोट चलाने का पुराना नेटवर्क है।