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पांच नामों से विरोधियों का काम तमाम करने की कोशिश

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चुनावी रैली को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साथ में खड़े प्रत्याशी राज कुमार सहयोगी - फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
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पांच नाम और विरोधियों का काम तमाम। इगलास विधान सभा उपचुनाव (सुरक्षित) में भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सहयोगी के पक्ष में लगसमा इंटर कॉलेज में चुनावी सभा करने पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने पांच बड़े नामों के सहारे विरोधियों पर वार किया। वहीं एएमयू का नाम लेकर ध्रुवीकरण की कोशिश से भी नहीं चूके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाषण की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर कहा कि मोदी है तो मुमकिन है। भाजपा के लिए मोदी का नाम किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस नाम का प्रभाव लगसमा इंटर कॉलेज में मोदी-योगी के नारे के रूप में देखने को मिला। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने के बहाने बाबा साहब आंबेडकर का नाम लिया और यह कहकर अनुसूचित जाति के मतदाताओं को साधने एवं गोलबंद करने का प्रयास किया कि बाबा साहब अनुच्छेद 370 के विरुद्ध थे। कांग्रेस ने इसे लाकर बाबा साहब का अपमान किया।
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चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर योगी ने जाटों एवं किसानों का साधने का प्रयास किया। कार्यक्रम स्थल ‘लगसमा इंटर कॉलेज मैदान’ रालोद एवं जाट नेताओं के बड़े-बडे़ सभाओं का गवाह रहा है। देश के किसानों के बीच चौधरी चरण सिंह बेहद लोकप्रिय हैं। चीनी मिल (चरण सिंह के गांव की) की दुर्दशा के बहाने मुख्यमंत्री योगी ने दुखती रग पर हाथ रखा। इसी बहाने सपा एवं बसपा पर निशाना साधा और यह अहसास कराने की कोशिश की कि सपा-बसपा के काल में चौधरी साहब और किसानों को भुला दिया गया था।
उसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का नाम लिया और कहा कि उन्होंने अलीगढ़ एवं उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाने का काम किया। यहां के ताला और हार्डवेयर उद्योग का विकास कर बेहतरीन बनाने का प्रयास किया। योगी को इस बात की सटीक सूचना थी कि इगलास विधान सभा क्षेत्र के दर्जनों गांव शहर के बेहद करीब है और यहां के लोग बड़ी संख्या में ताला-हार्डवेयर कारखानों में काम करते हैं। मुख्यमंत्री योगी सबसे अंत में राजा महेंद्र प्रताप पर आए।
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खास बात यह रही कि इस बार उन्होंने राजा महेंद्र प्रताप का उल्लेख स्वाधीनता आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख कर किया। यह भी कहा कि भारत माता के सपूत राजा महेंद्र प्रताप इसी मिट्टी के थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी। उसके बाद एएमयू का नाम लिया और कटाक्ष किया कि राजा महेंद्र प्रताप ने एएमयू को अपनी जमीन दी लेकिन एएमयू में उनके नाम पर एक भी शिलापट्ट नहीं है। राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर बेहतरीन विश्वविद्यालय बनाने की बात कर इशारे में यह संदेश देने का भी प्रयास किया कि एएमयू ने भले ही राजा महेंद्र प्रताप को भुला दिया हो, भाजपा की सरकार उनके महान व्यक्तित्व को आदर एवं सम्मान करना जानती है। महेंद्र प्रताप जाटों के प्रिय नेताओं में शामिल हैं। दरअसल एएमयू के नाम को भाजपा नेता हथियार की तरह ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल करते हैं।
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