अलीगढ़। दुनिया के महान कर्मयोगी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन पर कर्मठता का सच्चा उदाहरण गूलर रोड के रहने वाले योगेंद्र पाल और उनके परिवार ने दिया है। 25 अगस्त को उनका निधन होने के बाद उनका पार्थिव शरीर एएमयू के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को दान दे दिया गया। इस तरह करीब आठ वर्ष बाद मेडिकल कॉलेज को कोई देह प्राप्त हुई है। इससे पहले प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. केपी सिंह का पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को मिला था।
देहदान कर्तव्य संस्था के अध्यक्ष डॉ. एसके गौड़ ने बताया कि योंगेद्र पाल संस्था से जुड़े हुए थे और वह मरणोपरांत शरीर को दान करने का संकल्प पहले ही ले चुके थे। उनके पुत्र दीपक मैगी के द्वारा उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए मेडिकल कॉलेज से संपर्क किया गया। उनके सहयोग से पुलिस, एनओसी और सामान्य रूप से मृत्यु होने के प्रमाण पत्र बनने के बाद पार्थिव शरीर को ससम्मान मेडिकल कालेज द्वारा भेजी गई एंबुलेंस द्वारा एनाटमी विभाग भेज दिया गया। इस अवसर पर संस्था के सभी पदाधिकारी मौजूद थे।
डॉ. एसके गौड़ ने कहा कि यह मानवीय कदम निश्चित रूप से समाज के बीच एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। साथ ही मेडिकल की शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। कोषाध्यक्ष हितेश छाबड़ा ने कहा कि मैगी परिवार के लिए यह एक साहसिक कदम है। ऐसा ही साहसिक कदम समाज के सभी लोगों को उठाना चाहिए। डॉ. डीके वर्मा ने कहा कि मैगी परिवार ने अलीगढ़ में अमिट छाप छोड़ी है। इस मौके पर राजाराम मित्र, सहसचिव अजय सिंह, सुखनंदन आदि मौजूद थे।