दिल्ली हादसे के बाद ही अफसरों की नींद टूटी है। अलीगढ़ में तमाम सेंटर ऐसे हैं जो बेसमेंट में चल रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि अफसरों को पता न हो। सब जानते थे लेकिन संस्थाओं के संचालकों से याराना निभा रहे थे। बेसमेंट में जहां पार्किंग की जगह थी वहां कोचिंग सेंटर शुरू कर दिए गए। स्टोर में लैब खोल दी गईं। इतना ही नहीं यहां सुरक्षा के मानकों का भी ख्याल नहीं रखा गया। बेसमेंट में चल रहे इन सेंटरों का प्रवेश द्वार भी संकरा है। सही से हवा तक यहां नहीं पहुंच सकती। लेकिन मोटी रकम लेने वाले यह सेंटर संचालक लोगों की सेहत से खेल रहे थे। इसके लिए सीधे तौर पर अफसर ही जिम्मेदार हैं। जो कार्रवाई आज की जा रही है अगर पहले भी की गई होती तो यह हालात न होते।
मैरिस रोड पर बेसमेंट में जिम का संचालन हो रहा है। रामघाट रोड पर बेसमेंट में मार्केट बनी है, जिसमें कई दुकानें संचालित हो रही हैं। इसी तरह मीनाक्षी पुल के नीचे बेसमेंट में रेस्टोरेंट चल रहा है, यहां हवा के लिए क्रॉस वेंटिलेशन नहीं है। बेसमेंट में जाने के लिए एक ही रास्ता है, जो अप्रिय घटना होने पर निकलने में मुश्किल हो सकती है। इसी दोधपुर में भी बेसमेंट में दुकानें चल रही हैं।
पहले कार्रवाई क्यों नहीं
दिल्ली के कोचिंग सेंटर में हादसे के बाद एडीए ने यहां बेसमेंट में चल रहे कोचिंग सेंटर सहित अन्य प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की है। महानगर के लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पहले क्यों नहीं की गई? क्या हादसों के बाद ही इस तरह की कार्रवाई होती है?