भारत और चीन के बीच मौजूदा टकराव का असर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों और उनके चाइना की कंपनियों में प्रस्तावित प्लेसमेंट पर भी पड़ा है। 2 महीने पहले यहां पर बहुत से छात्रों का चयन बड़ी चाइनीज कंपनियों में हुआ।
चयन की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में ही थी कि मौजूदा घटना हो गई। एक छात्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि पूरे देश में चीन के प्रति आक्रोश की लहर को देखते हुए कंपनी ने फिलहाल चयन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है।
यही हाल अन्य चाइनीज कंपनियों का भी है, जो वेबीनार और डिजिटल माध्यम से अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालय के छात्रों को प्लेसमेंट देने की योजना बना रही थी। अब उन्होंने अपनी गतिविधियों को विराम दे दिया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कोई चाइनीज विद्यार्थी तो नहीं पढ़ता है, लेकिन यहां पर फॉरेन लैंग्वेज डिपार्टमेंट में चाइनीज भाषा का अध्ययन कराया जाता है।
चाइनीज भाषा सीख कर यहां के छात्र बड़ी-बड़ी चाइनीज कंपनियों में स्थान पाते हैं। समाजशास्त्री डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा कहते हैं कि दो देशों के बीच टकराव की स्थिति में बहुत से आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन होते हैं। आज हालांकि सीधा युद्ध करने से देश बचते हैं, लेकिन युद्ध जैसी स्थितियां अगर बन जाती हैं या टकराव के हालात तो होते हैं तो इसका असर आर्थिक संबंधों पर भी पड़ता है।