बस में सवारियों की टिकट बनातीं परिचालक संध्या।
- फोटो : samvad
जब मन में अटूट श्रद्धा और कर्तव्य के प्रति समर्पण हो तो भक्ति और ड्यूटी के बीच की राह खुद-ब-खुद आसान हो जाती है। रामनवमी के त्योहार पर अलीगढ़ की महिला परिचालकों ने कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है। घर की दहलीज पर कंजक पूजन और बस के पायदान पर यात्रियों की सेवा, इन महिलाओं ने दोनों ही मोर्चों पर अपनी शक्ति का लोहा मनवाया।
मूल रूप से शिकोहाबाद की रहने वाली और वर्तमान में अलीगढ़-आगरा रूट पर तैनात महिला परिचालक संध्या की सुबह इस शुक्रवार कुछ खास थी। उन्होंने सूर्योदय के साथ पहले विधि-विधान से रामनवमी का पूजन किया, कन्याओं को प्रसाद खिलाया और फिर अपनी ड्यूटी के लिए निकल पड़ीं। संध्या का कहना है, पूजा हमारी आत्मा की शांति के लिए है और ड्यूटी हमारा धर्म है। मैंने सुनिश्चित किया कि त्योहार के कारण यात्रियों की सेवा में कोई बाधा न आए।
यह कहानी सिर्फ संध्या की नहीं है। अलीगढ़ डिपो की 25 और हाथरस डिपो की 15 अन्य महिला परिचालकों ने भी इसी जज्बे का परिचय दिया। इतनी बड़ी संख्या में होने के बावजूद किसी भी महिला परिचालक ने रामनवमी की छुट्टी नहीं ली। सुबह घर की रसोई और पूजाघर संभाला और फिर समय से बस स्टैंड पहुंचकर अपनी-अपनी बसों की कमान थाम ली।