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अलीगढ़: हीरक जयंती पर राममय हुआ टीकाराम मंदिर, झूम उठे श्रद्धालु

Sun, 21 Mar 2021 05:21 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
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श्री टीकाराम मंदिर में 75 वर्ष हरिक जयंती महोत्सव में आयोजित भजन संध्या में प्रस्तुति देते पंडित। - फोटो : अमर उजाला
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हीरक जयंती महोत्सव पर टीकाराम मंदिर शनिवार को अयोध्या के कनक भवन की तरह राममय हो गया। सुबह हवन-यज्ञ हुआ तो शाम को शिला पट्टिका के अनावरण के साथ भजन संध्या आयोजित हुई। भजन संध्या में दूरदर्शन व रेडियो में रस विभोर करने वाले कलाकार पं. सुजीत ओझा ने राम का गुणगान किया तो श्रद्धालु झूम उठे। यहां कनक भवन की परंपराओं का निवर्हन किया गया तो मौके पर पहुंचे श्रद्धालु राम की भक्ति में डूब गए।
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टीकाराम मंदिर में विग्रहों के लिए फूल बंगला सजाया गया। राम दरबार व हनुमान मंदिर के विग्रहों का भव्य शृंगार कर पोशाक और मुकुट धारण कराए गए। सुबह पूजा अर्चना के बाद हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर को लाइटिंग, गुब्बारे आदि से सजाया गया। मुख्य अतिथि के रूप में विहिप के कार्यवाहक अध्यक्ष आलोक कुमार एडवोकेट ने प्रतिभाग किया। यहां शिला पट्टिका का अनावरण कर भजन संध्या आयोजित हुई।

पं. सुजीत ओझा ने अपने सुरीले अंदाज में प्रभु श्री राम का गुणगान किया। भजन संध्या के बाद लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। इससे पहले प्रबंध न्यासी हरी प्रकाश गुप्ता, सह प्रबंध न्यासी पवन गुप्ता व न्यासी सिद्धार्थ गुप्ता ने अपने पूर्वज लाला टीकाराम, कैप्टन डॉ. रामस्वरूप गुप्ता, विद्यावती गुप्ता, वेदप्रकाश गुप्ता तथा डॉ. विजय गुप्ता के चित्र पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया।
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यहां मंडलायुक्त गौरव दयाल, सांसद सतीश गौतम, कोल विधायक अनिल पाराशर, शहर विधायक संजीव राजा, पूर्व महापौर शकुंतला भारती, डॉ. महेंद्र कुमार मिश्रा भी प्रभु श्री राम सीता विग्रह का आशीर्वाद लेने पहुंचे। हवन यज्ञ में हरिप्रकाश गुप्ता, कुसुम गुप्ता, पवन गुप्ता, संगीता गुप्ता, मीनाक्षी अग्रवाल कानपुर, शशि शर्मा, देवेंद्र गुप्ता, प्रदीप अग्रवाल, प्रेम किशोर पटाखा, जय नारायण तिवारी, संध्या तिवारी, रामजी पंडित, राजू पंडित, नवेंदु पंडित, श्याम पंडित, आनंद पंडित, राजू पंडित आदि मौजूद रहे।

रघुनंदन शहर महाराज की प्रेरणा से अलीगढ़ में बना कनक भवन
शहर के सेंटर प्वाइंट स्थित टीकाराम मंदिर की भक्ति भावना अयोध्या की तर्ज पर है। इसका मूल कारण इस मंदिर के निर्माण में छिपा हुआ है। लाला टीकारामजी के पुत्र कैप्टन डॉ. रामस्वरूप गुप्ता की पत्नी विद्यावती गुप्ता की अटल रामभक्ति ही है। जिसके चलते अयोध्या के हनुमत निवास के महंत रघुनंदन शरण महाराज की प्रेरणा से अलीगढ़ में वर्ष 1946 में कनक भवन की स्थापना हुई। डॉ. रामस्वरूप व पत्नी विद्यावती गुप्ता ने उस समय जो भक्ति भाव का संकल्प लिया। उसे आज भी टीकाराम परिवार निभाता चला आ रहा है।

हीरक जयंती से पहले प्रबंध न्यासी हरि प्रकाश गुप्ता ने विगत महीनों पहले पूरे मंदिर के सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार का कार्य संपन्न कराया है। बता दें कि लाला टीकाराम के पुत्र कैप्टन डॉ. रामस्वरूप गुप्ता उप्र के विभिन्न जनपदों में सिविल सर्जन के रूप में कार्यरत थे। जब नियुक्ति फैजाबाद में हुई तो उनकी पत्नी विद्यावती गुप्ता निरंतर अयोध्या जाती रहती थीं। वहां गली कूचों में इष्टदेव की प्राप्ति के लिए गुरु की खोज करती रहती थीं। अथक प्रयास से उन्हें हनुमत निवास के महंत रघुनंदन शरण मिले।

उन्हीं की प्रेरणा से श्री टीकाराम मंदिर में कनक भवन की स्थापना की गई। जिसमें भगवान रामचंद्र के परिवार के विग्रह स्थापित किए गए। विद्यावती गुप्ता भगवान राम के विग्रहों से टकटकी लगाकर लगातार छह घंटे तक भजन किया करती थीं। अलीगढ़ में यह इकलौता मंदिर हैं, जहां मैथिली शैली से श्रीराम विवाह संपन्न होता है। इस विवाह का कुंवर कलेवा मैथिली परंपराओं के साथ ही आयोजित होता है, जिसमें प्रभु श्री राम व उनके भाइयों को सखियां गारी देती हैं। इन गारियों को सुनाने का रिवाज इस मंदिर में वर्षों पुराना चला आ रहा है।

अयोध्या और ओरछा के बाद यहां विराजे हैं श्रीराम सीता के विग्रह
मंदिर के सेवायत राजू पंडितजी ने बताया कि अयोध्या के कनक भवन और ओरछा में जिस प्रकार श्रीराम सीता के विग्रह विराजमान हैं। उसी प्रकार अलीगढ़ में भी विराजमान हैं। कनक भवन में प्रभु श्रीराम माता जानकी के साथ बैठे हैं। टीकाराम परिवार जितना अलीगढ़ के कनक भवन में सेवा करता है। उतनी ही सेवा अयोध्या के कनक भवन में की जाती हैं।

क्योंकि विद्यावती गुप्ता के संकल्प का निर्वहन आज भी परिवार कर रहा है। अयोध्या से ही पूरे साल के आयोजन के निर्देश आते हैं। कनक भवन और ओरछा में श्रीराम सीता के तीन-तीन विग्रह विराजमान हैं। जबकि यहां दो विग्रह विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि विद्यावती देवी को अयोध्या में कई साधु महात्मा डॉक्टरनी के नाम से जानते हैं। उनकी भक्ति भावना से सभी परिचित हैं।
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