बेशक 75 माइक्रोन से कम क्षमता वाली पॉलिथीन सहित 19 प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लागू हो गया, मगर इस प्रतिबंध के दस दिन बीतने के बाद भी बाजार में पॉलिथीन (कैरी बैग) का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। फल-सब्जी की ढकेलों पर ये कैरीबैग आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, बड़े रिटेल काउंटरों पर यह बैग नहीं दिखाई दे रहे। उन काउंटरों पर कपड़ा व पेपर बैग ही प्रयोग किए जा रहे हैं। इससे बाजार में पेपर-कपड़ा बैग की मांग भी बढ़ने लगी है। ये बात खुद इसके सप्लायर स्वीकार रहे हैं।
12 जुलाई को विश्व पेपर बैग दिवस मनाया जाता है। इसे लेकर जब शहर में पेपर बैग की पड़ताल की गई तो पाया कि सिर्फ एक कारखाना शहर में पेपर बैग बनाने का ताला नगरी में है। इसके अलावा तमाम घरों में बासी कागज व अखबार से लिफाफा बनाने का काम चल रहा है, जिसका प्रयोग छोटे दुकानदार करते हैं। तालानगरी में कारखाना चला रहे ईशान गोविल बताते हैं कि पॉलिथीन प्रतिबंध के बाद उने यहां मांग पांच फीसदी तक बढ़ी है। वे बताते हैं कि 1500 किलो कागज बैग प्रतिमाह बना रहे हैं। हालांकि उनका लक्ष्य 2500 किलो प्रतिमाह कागज बैग बनाने का है। मगर अभी बाजार में इतनी डिमांड नहीं है। हां, बड़े ब्रांड व शोरूमों का कारपोरेट स्तर पर काम होता है। उन्हें कंपनी स्तर से ही पेपर बैग मिलते हैं।
कपड़ा बैग की भी बढ़ रही मांग
निरंजनपुरी में कपड़ा बैग बनाने वाले संतोष शर्मा के अनुसार शहर में करीब 30 कपड़ा बैग बनाने के कारखाने हैं। पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद मांग लगातार बढ़ रही है। आलम ये है कि जो कारखाना अब तक दो ट्रक माल सप्लाई दे रहा था। वह अब तीन ट्रक सप्लाई कर रहा है, मगर रिटेल काउंटरों पर डिमांड ज्यादा बढ़ी है।
दस दिन बाद भी नहीं कहीं कोई रोकटोक
बाजार में सब्जी व फल की ठेलों पर जमकर पॉलिथीन प्रयोग हो रही है। एक जुलाई से प्रतिबंध लागू हुआ है और उन्हें एजेंटों के जरिये खुलेआम पॉलिथीन पहुंच रही है। इसे लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी सिंह बताते हैं कि अभी इसे लेकर रणनीति बनाई जा रही है। जल्द चेकिंग व धरपकड़ अभियान चलाया जाएगा। वे कहते हैं कि अभी तक लोगों को जागरूक किया गया है। इसका परिणाम ये है कि बाहर से माल आना बंद है। जो रखा हुआ स्टाक है, उसी को गोपनीय तरीके से बेचा जा रहा है।
- हम बाजार में पॉलिथीन प्रतिबंध के साथ हैं। मगर सरकार को चाहिए कि उन एमएनसी कंपनियों के उत्पादों की पैकिंग पर भी रोक लगे, जो पॉलिथीन में आती है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। सिर्फ छोटे दुकानदार को ही इस कानून के नाम पर परेशान न किया जाए।-भूपेंद्र वार्ष्णेय, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल