जिले में निर्धारित 33 फीसदी की जगह मात्र 2 फीसदी वन क्षेत्र बचा है। शहर के अंदर 120 से अधिक प्रदूषित इकाइयों को शहर के बाहर करने के लिए अदालत का फरमान जारी हो चुका है। 75 फीट पर मिलने वाला पानी अब 250 फीट की गहराई तक पहुंच गया।
यह अलीगढ़ की जमीन की हालत है। विश्व पृथ्वी दिवस पर यह प्रश्न विचारणीय है कि जिले की बदहाल होती आबोहवा किस तरह सुधरेगी? अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अफीफुल्ला कहते हैं कि पृथ्वी और उसका पर्यावरण मनुष्य द्वारा पैदा की गई जटिल परिस्थितियों से लगातार जूझ रहा है। पिछले 10 हजार वर्षों में प्रकृति और मनुष्य के बीच जो एक संतुलन बना हुआ था। वह गत 250 वर्षों के औद्योगीकरण ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
सिकुड़ते जंगल, लुप्त होती प्रजातियां, तबाह होता परिस्थितिकीय चक्र, जहरीला होता भूजल और विषैली होती हवा के साथ पृथ्वी का क्या होगा यह तो पता नहीं लेकिन मनुष्य जाति निश्चित रूप से बुरी तरह प्रभावित होने वाली है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ही भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अतीक अहमद कहती हैं कि पृथ्वी का लगातार बढ़ रहा तापमान भी बहुत बड़ी चिंता का कारण है और इस पर दुनिया के राजनेताओं को वैज्ञानिकों को गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है।
2021 के विश्व पृथ्वी दिवस की थीम रिस्टोर अवर अर्थ है
अलीग फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद वसी बेग कहते हैं कि इस वर्ष की थीम रिस्टोर अवर अर्थ है। इसका ध्यान प्राकृतिक प्रक्रियाओं, उभरती हुई हरित तकनीकों और नवीन सोच पर है, जो दुनिया के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल कर सकता है।
1970 में हुई शुरुआत
विश्व पृथ्वी दिवस की स्थापना अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने पर्यावरण शिक्षा के रूप में की थी। यह दिन 22 अप्रैल 1970 को शुरू हुआ और आज दुनिया के 192 देशों में 1 बिलियन से अधिक लोग पृथ्वी दिवस मना रहे हैं।
जिंदगी में हर इंसान अगर विश्व पृथ्वी दिवस के दिन ही थोड़ा-बहुत योगदान दे तो धरती के कर्ज को उतारा जा सकता है। हर व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की बहुत जरूरत है, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब पृथ्वी पर जीवन नरक से बदतर हो जाएगा।
- मोहम्मद अब्दुल जलील सिद्दीकी, शिक्षक, जीडी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल।