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विश्व कैंसर दिवस: जेएन मेडिकल कॉलेज में हर साल आते हैं चार हजार से अधिक कैंसर के मरीज

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डॉ विकास मेहरोत्रा । - फोटो : CITY OFFICE
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कौशल कुमार ओझा
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जेएन मेडिकल कॉलेज में हर साल चार हजार से अधिक कैंसर के मरीज सामने आते हैं। वह भी एडवांस स्टेज में। हम चाहें तो भयावह स्थिति को टाल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि जांच कर बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए।
दुनिया में कैंसर के दो करोड़ नए केस हर साल सामने आते हैं। इसमें से आधे विकासशील एवं अविकसित देशों के होते हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एवं रेडियोथेरेपी विभाग के प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि लोगों को जागरूक कर कैंसर के 50 प्रतिशत खतरे को पहले ही कम किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल द्वारा प्रत्येक वर्ष 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस बार की थीम ‘क्लोज द केयर गैप’ है।
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जेएन मेडिकल कॉलेज में सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की सुविधा
जेएन मेडिकल कॉलेज में कैंसर का उपचार होता है। यहां पर सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। 50 बेड का कैंसर वार्ड है। प्रिंसिपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी कहते हैं कि महिलाओं में सबसे अधिक गर्भाशय, स्तन और अंडाशय कैंसर देखने को मिलते हैं। समय से पहचान होने पर इसे रोका जा सकता है। पुरुष सबसे अधिक फेफड़े, गले और मुंह के कैंसर की चपेट में आते हैं। गुदा एवं गोल ब्लाडर के भी कैंसर सामने आते हैं। वह कहते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिर्फ जेएन मेडिकल कॉलेज में कैंसर उपचार की सुविधा है। यहां उपचार के लिए अलीगढ़ के अतिरिक्त हाथरस, मथुरा, रामपुर, बदायूं, सहारनपुर, बुलंदशहर और बिहार तक के मरीज आते हैं।
जेएन मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक साल चार हजार से अधिक नए मरीज आते हैं। वह भी एडवांस स्टेज में, जब हम बहुत कुछ नहीं कर पाते। कैंसर के प्रति जागरूक करने के लिए हमें सभी स्वास्थ्य केंद्रों को जोड़कर एक चेन बनाने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता बेहद जरूरी है। शुरुआती समय में पकड़ में आ जाए तो खतरा न के बराबर रहता है।
- प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी, प्रिंसिपल, जेएन मेडिकल कॉलेज
प्रमुख बिंदु
- जेएन मेडिकल कॉलेज में हर साल सामने आते हैं चार हजार से अधिक कैंसर के रोगी।
- महिलाओं में सबसे अधिक सामने आते हैं गर्भाशय, स्तन एवं अंडाशय कैंसर के केस।
- पुरुषों में सबसे अधिक फेफड़े, गले, मुंह, गुदा एवं गोल ब्लाडर कैंसर के केस।
- बच्चों में सबसे अधिक ब्लड कैंसर, लिम्फोमा, ब्रेन ट्यूमर, बोन ट्यूमर के केस।
- मेडिकल कॉलेज में है 50 बेड का कैंसर वार्ड, सर्जरी, रेडियोथेरेपी व कीमोथेरेपी की सुविधा।
नैनिहालों को निगल रहा कैंसर
कैंसर से सिर्फ बड़ों को ही खतरा नहीं है। शून्य से 14 वर्ष के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो भारत में प्रत्येक साल 50 हजार केस सामने आते हैं। आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार कुल कैंसर रोगियों में बच्चों का प्रतिशत 7.9 है। उत्तर प्रदेश में 10 लाख की आबादी पर प्रत्येक साल 100 केस सामने आते हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में साल में करीब 100 बच्चे आते हैं। हालांकि उनको उपचार के लिए नोएडा या दूसरे शहरों में भेजा जाता है। स्थानीय किलकारी हॉस्पिटल में महीने में एक या दो नए केस सामने आते हैं।
विकसित देशों में पांच साल में 95 प्रतिशत बच्चे क्योर हो जाते हैं। हमारे देश में यह प्रतिशत मात्र दस है। इसका कारण यह है कि हम कैंसर को देर से पकड़ते हैं। जल्दी पता लगने पर बच्चों को खतरा से बचाया जा सकता है। बच्चों की मामूली बीमारियों को नजरअंदाज न करें। कोई लक्षण हो तो जरूर चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है।
- डॉ. विकास मेहरोत्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
मुंह के कैंसर के रोगियों में 86 प्रतिशत भारतीय : आईडीए
विश्व स्तर पर मुंह का कैंसर छठा सबसे आम प्रकार का कैंसर है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर की हालिया रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत में दुनिया भर के मुंह के कैंसर का 86 फीसदी हिस्सा है।
मैरिस रोड स्थित एक होटल में इंडियन डेंटल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार गर्ग, सचिव डॉ. उमीत सिंह एवं जेडए डेंटल कॉलेज के वरिष्ठ प्रो. एसएस अहमद ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी। पदाधिकारियों ने कहा कि मुंह का 90 प्रतिशत कैंसर तंबाकू चबाने और गुटखा खाने से होता है।
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हर साल तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर के 1.5 लाख मामले सामने आते हैं। 70 प्रतिशत मामले एडवांस स्टेज में सामने आते हैं। सचिव उमीत सिंह ने बताया कि आईडीए ने स्पॉट प्रिवेंट ओरल कैंसर ट्रॉमा (स्पॉट केंद्रों) की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य जीवन शैली में बदलाव के लिए परामर्श एवं नियमित जांच से व्यक्तियों की मृत्यु दर में कमी लाना है। प्रो. एसएस अहमद ने बताया कि एएमयू के जेडए डेंटल कॉलेज में पिछले साल से सर्जरी शुरू कर दी गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अकादमी के डॉ. नूरूल अनवर ने बताया कि विश्व कैंसर दिवस पर 5-6 फरवरी को दो दिवसीय इंटरनेशनल ओरल कैंसर कांग्रेस 2022 का ऑनलाइन आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश के दंत चिकित्सक ओरल कैंसर के उपचार की नई तकनीक की जानकारी देंगे।

प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी। प्रिंसिपल जेएन मेडिकल कॉलेज- फोटो : CITY OFFICE

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