कोरोना के चलते पूरे देश में लॉक डाउन की घोषणा के बाद घर बैठे श्रमिकों का पारिश्रमिक नहीं काटा जा सकेगा। निजी संस्थान, फैक्ट्री, दुकान एवं होटल स्वामियों समेत अन्य व्यवसायियों को अपनी इकाई में कार्यरत श्रमिकों का मार्च माह का पूरा पारिश्रमिक देने के आदेश दिये हैं।
फैक्ट्री स्वामियों से तनख्वाह देने संबंधी प्रमाणपत्र भी तलब किया गया है। चेतावनी दी गई है कि पारिश्रमिक न देने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निजी संस्थान, पब्लिक स्कूल, दुकान एवं होटल संचालकों की बैठक लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी अनुनय झा ने स्पष्ट कहा कि इन सभी को अपने यहां कार्यरत श्रमिकों को हर हाल में बंदी की अवधि का पैसा देना होगा। कम से कम मिनिमम वेजेज 8500 रुपये तो देने ही होंगे। ऐसा न करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हर इंडस्ट्री का अलग नोडल अफसर नियुक्त
अलीगढ़। सीडीओ ने बताया कि श्रमिकों को बंदी के दौरान का पारिश्रमिक दिलाना सुनिश्चित करने के लिए हर इंडस्ट्री के लिए अलग नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। यह नोडल अफसर अपने अधीनस्थों के माध्यम से फैक्ट्री एवं प्रतिष्ठान में कार्यरत श्रमिकों का डाटा एकत्र कराकर पारिश्रमिक दिलाना सुनिश्चित करेंगे।
संचालकों को देना होगा प्रमाणपत्र
अलीगढ़। व्यवसायिक इकाई संचालकों को अपने यहां कार्यरत श्रमिकों को बंदी की अवधि 20 मार्च से 31 मार्च तक का पूरा पारिश्रमिक देने का प्रमाणपत्र देना होगा। प्रशासन के स्तर से यह आदेश जारी हो गये हैं।
श्रमिकों से पूछेंगे अफसर पारिश्रमिक मिला या नहीं
हर श्रमिक को उसका पारिश्रमिक दिलाने के लिए रेंडम चेकिंग की व्यवस्था की गई है। सीडीओ ने बताया कि इकाई संचालकों को 29 मार्च तक हर सूरत में श्रमिकों को पारिश्रमिक देने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा नोडल अफसर एवं उनकी टीम खुद श्रमिकों को रेंडमली फोन कर पूछेंगे कि पारिश्रमिक मिला या नहीं।