सशक्त और स्वावलंबी महिला की तस्वीर देखनी हो तो खैर के गांव बांकनेर आ जाइए और दिव्या शर्मा से मिल लीजिए। पैड वूमन के नाम से मशहूर दिव्या घर पर बने सैनिटरी पैड का कारोबार कर महिलाओं को स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दे रही हैं। उनके यहां तैयार किए गए पैड वाराणसी, मध्यप्रदेश के सागर व पंजाब तक जाते हैं। दिव्या ने अपने इस काम से कई महिलाओं को रोजगार दे रखा है।
एमकॉम बीएड तक पढ़ीं दिव्या शर्मा मासिक धर्म में स्वच्छता के प्रति महिलाओं को जागरूक भी करती हैं। दिव्या अपने कामयाब सफर को याद करती हुई कहती हैं कि 2010 में वयम टेक कंपनी से जुड़ीं। 2011 में गांव में सामान्य सेवा केंद्र (कामन सर्विस सेंटर) शुरू कर दिया। सीएससी की एक कार्यशाला 2017 में दिल्ली में हुई थी, जिसमें 27 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यहां पर उनके सीएससी को टॉप-10 में चुना गया। तीन दिन तक चली इस कार्यशाला में तेलंगाना की कंपनी ने सैनिटरी पैड बनाने के प्रोजेक्ट का प्रदर्शन किया था, तभी से इस कार्य को करने की ठान ली।
2018 में ई-गवर्नेंस के माध्यम से स्त्री स्वाभिमान योजना के तहत नार्थ इंडिया में पहले प्रोजेक्ट के रूप में घर पर ही पैड बनाने की शुरुआत की। सात महिलाओं को रोजगार भी दिया है। जो एक माह में करीब 50 हजार तक सैनिटरी पैड बना लेती हैं। एक महिला रोजाना एक हजार से 15 सौ रुपये तक कमा लेती है। 2018 में वाराणसी में 16 हजार, पंजाब में 22 हजार व 2019 में मध्यप्रदेश के सागर में 32 हजार सैनिटरी पैड की आपूर्ति की गई थी।
सात बार हो चुकी हैं सम्मानित
दिव्या को कामन सर्विस सेंटर के लिए पहली बार केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक टैबलेट व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। उसके बाद सैनिटरी पैड बनाने के प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद व स्मृति ईरानी ने सम्मानित किया। मथुरा में आयोजित विकास पर्व में उन्हें बेस्ट वीएलए (ग्राम स्तरीय उद्यमी) चुना गया। जहां रविशंकर प्रसाद और सांसद हेमा मालिनी ने टैबलेट व सर्टिफिकेट देकर पुरस्कृत किया। इस तरह से अलग अलग कार्यक्रमों में उनको अब तक सात सम्मान मिल चुके हैं।