इमरजेंसी से मरीज को वापस लेकर जाते परिजन।
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जेएन मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल छठवें दिन भी जारी रही। शनिवार को इलाज के अभाव में एक महिला ने दम तोड़ दिया। छह दिन में कुल 17 मरीजों की मौत हो चुकी है। हड़ताल के चलते मरीज व उनके तीमारदारों को बिना इलाज के लौटना पड़ा।
महानगर के शाहजमाल निवासी निसारा बानो (55) को उनके परिजन गंभीरावस्था में जेएन मेडिकल कॉलेज लाए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मरीजों को बिना उपचार दिए गेट से ही वापस लौटा दिया गया। मरीज और तीमारदार गम और गुस्से के साथ वापस जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने डॉक्टर, प्रशासन व सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई। उधर, जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल खत्म करने के एलान से मरीज व उनके तीमारदारों ने राहत की सांस ली है।
जूनियर डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं हुई तो धरना देंगे
भारतीय समाज सेवक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. इफराहीम हुसैन ने कहा कि जेएन मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी में जो इलाज के अभाव में मौत हुई है, उसके जिम्मेदार डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कॉलेज के बाहर निजी अस्पतालों से मिलकर कमीशन के तौर पर डॉक्टर काम कर रहे हैं, इनकी जांच होनी चाहिए ।
इस संबंध में जेएन मेडिकल कॉलेज के सीएमएस को ज्ञापन सौंपा गया है, जिस पर राष्ट्रीय सचिव मसरूर अहमद, प्रदेश अध्यक्ष अनिल सेंगर, कमल सिंह, दीनदयाल सिंह, डॉ. सदफ फातिमा के हस्ताक्षर हैं। ज्ञापन में कहा कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो धरने पर बैठने से गुरेज नहीं करेंगे।