सर्दी शुरू होते ही अपने पालतू पशु की देखभाल के लिए पशु पालक को अलर्ट हो जाना चाहिए। ठंड में अगर उनका ख्याल नहीं रखा गया, तो आपकी जेब भी ठंडी हो सकती है। अपने पालतू जानवरों की देखभाल सर्दियों में कैसे करें, इस पर अलीगढ़ के वरिष्ठ पशु शल्य चिकित्सक डॉ विराम वार्ष्णेय ने टिप्स दिए।
सर्दी शुरु हो चुकी हैं। जहां दिन का तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहता है, वहीं रात में तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अगर आप कुत्ता, बिल्ली, खरगोश आदि पालतू पशु रखते हैं, तो ठंड में उनका खास ख्याल रखना चाहिए। अगर सही से देखभाल न की गई, तो पशु की तबियत कभी भी खराब हो सकती है।
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अपने पालतू जानवरों की देखभाल सर्दियों में कैसे करें, इस पर अलीगढ़ के वरिष्ठ पशु शल्य चिकित्सक डॉ विराम वार्ष्णेय ने टिप्स दिए। डॉ विराम वार्ष्णेय ने बताया कि अपने पालतू पशु के रहने के लिए ठंडी हवाओं और कम तापमान से बचाने वाला एक आरामदायक और अछूता आश्रय होना चाहिए। ऐसी जगह के ठंडे फर्श से बचने के लिए पालतू जानवरों के पास कंबल या गर्म बिस्तर हों।
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उन्होंने बताया कि पालतू जानवर के आहार को उनकी ज़रूरतों के अनुसार समायोजित करें। कुछ जानवरों को गर्म रहने के लिए अधिक कैलोरी की आवश्यकता हो सकती है। अपने पालतू जानवरों की पानी तक पहुंच में कोई रूकावट नहीं होनी चाहिए। पानी की कमी से निर्जलीकरण हो सकता है। पानी सामान्य तापमान का हो। ठंड में पालतू जानवर के कोट को अच्छी स्थिति में रखने के लिए नियमित रूप से संवारना आवश्यक है। यह कोट बेहतर इन्सुलेशन प्रदान करता है।
डॉ विराम वार्ष्णेय ने बताया कि अत्यधिक ठंड में बाहरी गतिविधियों को सीमित करें। यदि आपका पालतू जानवर बाहरी समय का आनंद लेता है, तो इसे छोटा रखें। अपने पालतू जानवर के पंजे की जाँच नियमित करें। टहलने के बाद नमक या रसायन हटाने के लिए उनके पंजे पोंछें। अगर फर्श पर कुछ गिर जाए, तो उसे तुरंत साफ करें। कई बार बिखरी हुई वस्तु आपके जानवर के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
उन्होंने पालतू पशु की शीतकालीन स्वास्थ्य जांच पर सलाह देते हुए कहा कि ठंड के महीनों की विशिष्ट चिंता का समाधान करने के लिए अपने पशुचिकित्सक के साथ पालतू पशु के स्वास्थ्य जांच का समय निर्धारित करें। उन्होंने पालतू जानवरों के लिए घर के अंदर ही खेल और संगीत की व्यवस्था करने की सलाह दी। पालतू जानवरों को मानसिक रूप से उत्तेजित और शारीरिक रूप से सक्रिय रखने के लिए इनडोर गतिविधियाँ और खेल का समय देना बहुत जरूरी है।