जिला कारागार में अब बंदी अपने-अपने कौशल का पूरा विकास कर पाएंगे। उनको कौशल विकास योजना के तहत मनचाही ट्रेड में काम करने, उसे बेहतर बनाने, उसके अनुसार उत्पादन करने और नाम कमाने का पूरा मौका मिलेगा। नए साल में जेल प्रशासन नए कलेवर के साथ बंदियाें के हुनर को निखारने के लिए सामने आ रहा है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जनवरी 2018 में इसको मूर्त रूप दे दिया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने हरी झंडी दे दी है।
कुछ दिन पहले ही त्रैमासिक निरीक्षण के दौरान एसएसपी राजेश पांडेय, सीडीओ दिनेश चंद्र, अपर जिलाधिकारी नगर एसबी सिंह के सामने ये प्रस्ताव रखा गया था, जिसे पास करने की तैयारियां चल रही हैं। यहां के बंदियों का सृजन देखकर सीडीओ दिनेश चंद्र ने कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा था। इसके साथ ही एएमयू प्रशासन ने पांच कंप्यूटर दिए हैं। जिसको मिलाकर एक छोटी लैब बन रही है।
यहां बंदी अपने काम की डिजाइन तैयार करने के साथ पूरा लेखाजोखा रख सकेंगे। उनको कंप्यूटर शिक्षा भी मिल पाएगी। इसके माध्यम से जेल में डिजिटल इंडिया मिशन के तहत आनलाइन पेमेंट करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जिससे वह भविष्य में कैशलेस ट्रांजेक्शन भी कर सकें। गौर हो कि अलीगढ़ जिला कारागार बंदी वर्तमान में बेकरी प्रोडक्ट में नमकीन एवं मीठे बिस्कुट, कारपेंटर सेक्शन में फर्नीचर, इलेक्ट्रानिक मोटर वाइडिंग, जूट के बैग बनाते हैं। जूट के बैग महिला बंदी तैयार करती हैं। इन सभी उत्पादों की सप्लाई अलग-अलग जगहों पर होती है। बंदी यहां स्थापित इग्नू के सेंटर में पढ़ाई भी करते हैं। 3500 बंदियों की इस जेल में वर्तमान में 1500 बंदी पढ़ाई कर रहे हैं।
हाल ही में प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण में कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण केंद्र खोलने पर सहमति बनी है। जनवरी तक ये केंद्र यहां स्थापित होगा। एएमयू इंतजामिया ने पांच कंप्यूटर सिस्टम दिए हैं। जिससे एक छोटी लैब बनेगी। जहां बंदी कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर पाएंगे। इनके अलग अलग कामों का पूरा डाटा भी इस लैब में रखा जाएगा। अलग अलग डिजाइन के साथ नए उत्पाद बनाने में भी बंदियों को मदद मिलेगी। - आलोक सिंह, वरिष्ठ अधीक्षक कारागार।