पूछताछ पर मृतक की पत्नी ललिता ने बताया कि शादी चार वर्ष पहले हुई। पति बड़ी गाड़ी के डाईवर थे, जो अक्सर दिल्ली, बम्बई, कलकत्ता गाड़ी लेकर जाते थे। वह कई-कई दिनों बाद घर आते थे। ललिता की सगी बुआ की शादी मृतक के चाचा सौदान सिंह के साथ हुई। ललिता अक्सर अपनी बुआ के घर पर आती-जाती थी। वहां पर उसकी मुलाकात बुआ के बेटे यानी देवर नीरेश से हुई। नीरेश शादी शुदा नहीं है। अपने पति की गैर मौजूदगी में दोनों की मुलाकात अवैध संबंधों तक बढ़ गयी। दोनों एक दूसरे को चाहने लगे। दोनों साथ-साथ रहकर जीना चाहते थे।
ललिता ने नीरेश से कई बार कहा कि तुम मेरे पति ऋषि को रास्ते से हटा दो, तब दोनों मजे से रहेंगे । नीरेश ने कहा था कि इन्तजार करो, जल्दी ही ऋषि को रास्ते से हटा दिया जाएगा। 7 जून को नीरेश के भाई बबलू की शादी थी। शादी में पति-पत्नी शादी से एक-दो दिन पहले आ गए। शादी के बाद 10-12 दिन गांव में रहे। 17 व 18 जून की रात्रि में अवैध संबंधों को लेकर पति ने पत्नी को भला बुरा कहकर मारा पीटा। वह नीरेश के घर आई और उसके कहा कि आज मौका है ऋषि को ठिकाने लगा दो।
नीरेश कुछ देर बाद अपने घर से यह कहकर चला आया कि आज मैं ऋषि का काम तमाम कर देता हूं। नीरेश ने गली में गोली मारकर ऋषि की हत्या कर दी और आकर ललिता को बताया कि मैंने ऋषि को मार दिया। ललिता ने ये बात न अपने घर वालों को बताई, न ही गांव वालों को बताई और न ही पुलिस वालों को।