न्याय के लिए लड़ता रहा जेठ, सदमे में गई जान
इस पूरे मुकदमे को न्याय तक पहुंचाने में परिवार ने भारी कीमत चुकाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से जेपी राजपूत ने बताया कि मृतक सुरेश के बड़े भाई विजय सिंह ने ही इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और वही केस की मजबूत पैरवी कर रहे थे।
19 अप्रैल 2026 को किसी ने विजय सिंह को गलत सूचना दे दी कि इस हत्याकांड में आरोपी बीना और मनोज की जमानत हो गई है और वे गांव लौट रहे हैं। इस खबर का सदमा विजय सिंह बर्दाश्त नहीं कर सके और अचानक आए हृदयघात से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। भाई की मौत के बावजूद न्याय की यह लड़ाई रुकी नहीं और महज छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा हुआ दोषियों को सजा हुई।
प्रेमी का ही पक्ष लेती थी बीना
मृतक सुरेश दिल्ली में रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। पत्नी बीना तीनों बच्चों के साथ गांव में ही रहती थी। घर के पास ही परचून की दुकान चलाने वाले अविवाहित मनोज के साथ बीना के पिछले करीब आठ वर्षों से अवैध संबंध थे। जब सुरेश और उसके परिवार को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने इसका विरोध किया। कई बार पारिवारिक पंचायतें भी हुईं और सुरेश ने मनोज के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत भी दी थी। इसके बावजूद बीना अपने प्रेमी मनोज का ही पक्ष लेती रही, जिसके चलते पुलिस भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी। सुरेश परिवार और बच्चों की खातिर सब कुछ सहते हुए पत्नी के साथ निभाता रहा।
हत्या के बाद खुद पहुंचा था थाने
घटना से तीन दिन पहले ही सुरेश दिल्ली से घर आया था और दो दिन बाद उसे वापस ड्यूटी पर लौटना था। 10 जुलाई 2025 को जब सुरेश चबूतरे पर बैठकर मोबाइल देख रहा था, तब मनोज ने आकर उसके सीने में गोली उतार दी। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी मनोज खुद हत्या में इस्तेमाल तमंचा लेकर थाने पहुंच गया था, जहां पुलिस ने उसे और बाद में बीना को गिरफ्तार कर लिया था।
अंतरंग फोटो और वीडियो बने सजा का आधार
पुलिस ने जब इस मामले की तहकीकात की तो आरोपी मनोज के मोबाइल फोन को जांच के दायरे में लिया। उस मोबाइल से पुलिस के हाथ ऐसे डिजिटल सबूत लगे, जिन्होंने इस केस को और मजबूत बना दिया। मनोज के फोन से पुलिस को उसके और बीना के कई अंतरंग फोटो और वीडियो बरामद हुए। पुलिस ने इन डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में पेश किया, जो दोनों के अवैध संबंधों और इस सुनियोजित हत्या के गुनाह को साबित करने में सबसे बड़ा आधार बने।
पति और बच्चों को नशीली गोलियां देकर प्रेमी को बुलाती थी
फिरोजाबाद के रैपुरा क्षेत्र के बीच का नगला की रहने वाली 30 वर्षीय बीना की शादी करीब 12 साल पहले हुई थी। उसका पति सुरेश परिवार के भरण-पोषण के लिए दिल्ली में रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। हफ्ते-दस दिन में छुट्टी लेकर घर आता था। इसी बीच, घर से महज 20 मीटर की दूरी पर दुकान चलाने वाले मनोज से बीना के अवैध संबंध बन गए। चूंकि मनोज पड़ोसी था, इसलिए उसका घर पर आना-जाना भी शुरू हो गया था। बीना की अपने प्रेमी के प्रति दीवानगी इस हद तक बढ़ चुकी थी कि वह रास्ते के हर कांटे को हटाने के लिए शातिर तरीका अपनाती थी। बच्चों और पति को जब भी प्रेमी से मिलने में रुकावट महसूस होती, बीना उनके खाने में नींद की गोलियां मिला देती थी। गोलियों का असर होते ही पूरा परिवार गहरी नींद में सो जाता था, जिसके बाद वह बेखौफ अपने प्रेमी मनोज को घर बुलाती थी। सुरेश को जब इस बात की भनक लगी तो उसने अपनी पत्नी को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन बीना पर इसका कोई असर नहीं हुआ।