विधवा पेंशन के लाभार्थियों के सत्यापन में बड़ा खुलासा हुआ है। जिले में 342 मृत महिलाओं को भी पेंशन भेजी जा रही थी। 42 अपात्रों को भी पेंशन का भुगतान हो रहा था। जांच रिपोर्ट में यह खुलासा होते ही डीपीओ स्मिता सिंह ने इन सभी की पेंशन रोक दी है। साथ ही उनके खातों में भेजी जा चुकी पेंशन की धनराशि की रिकवरी के लिए बैंकों को पत्र जारी किया है।
महिला कल्याण विभाग की ओर से 2019 मार्च से अप्रैल 2020 तक पेंशन पाने वालीं 36288 लाभार्थियों का वार्षिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन में खुलासा हुआ कि पंचायत सेक्रेटरी और लेखपालों ने भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट गलत दी। इसकी वजह से 42 अपात्र और 342 मृत महिलाओं के खाते में पेंशन पहुंच रही थी। डीपीओ स्मिता सिंह ने बताया कि जांच के बाद इन सभी महिलाओं के नाम पेंशन सूची से हटा दिए गए हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इन महिलाओं के खाते में कितने रुपये पहुंच चुके हैं। बैंकों से इसकी जानकारी मांगी गई है।
साल दर साल ऐसे ही खुलती है पोल
अपात्र और मृत महिलाओं को पेंशन राशि जारी होने का यह पहला मामला नहीं है। वार्षिक सत्यापन में लेखपाल और पंचायत सेक्रेटरी की लापरवाही का ऐसा खुलासा साल दर साल होता रहता है। लेखपाल पर शहरी और पंचायत सेक्रेटरी पर ग्रामीण क्षेत्र के पेंशनर्स के सत्यापन की जिम्मेदारी होती है। विभागीय लोगों का कहना है कि दोनों स्तर पर लापरवाही से अपात्रों के खाते भी संचालित रह जाते हैं।