मडराक पुलिस द्वारा जब्त कर गोशाला को सौंपी गईं कई लाख रुपये की दुधारू 23 भैंसें गोशाला संचालक ने बेच दी हैं। थाना पुलिस ने गोशाला संचालक पर अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज किया है। इंस्पेक्टर मडराक की इस रिपोर्ट पर अदालत संतुष्ट नहीं है। अदालत ने साफ कहा है कि अदालत ने पहले भी आदेश जारी किए थे। तब कार्रवाई क्यों नहीं की? अब नोटिस जारी होने पर ही कार्रवाई क्यों की? इसे लेकर कोतवाल/प्रकरण विवेचक की भूमिका की जांच के निर्देश देते हुए एसएसपी से एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।
मूल रूप से सिकंदराराऊ हाल निवासी भुजपुरा का पशु व्यापारी शानू पांच जनवरी को आगरा से एक वाहन में 23 भैंसें खरीदकर ला रहा था, जिन्हें मडराक पुलिस ने चेकिंग में पकड़ा और पशु क्रूरता आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कर शानू को जेल भेज दिया। पशुओं को आसना स्थित गोशाला में रखवा दिया। न्यायालय से जमानत पर रिहा हुए शानू ने जब अदालत से रिलीज आदेश लिया तो आज तक न पुलिस और न गोशाला संचालक उन पशुओं को वापस कर रहा है। इसे लेकर अदालत ने सोमवार को इंस्पेक्टर को तलब करते हुए चेतावनी नोटिस जारी किया था। साथ में कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए एसएसपी को लिखा था। मामले में मंगलवार को मडराक इंस्पेक्टर ने जेएम प्रथम की अदालत में पेश होकर रिपोर्ट दी कि पशुओं को कहीं खुर्द-बुर्द या शिफ्ट किया गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
शानू के अधिवक्ता सुरेश चंद्र गौतम के अनुसार इस मामले में अदालत ने जारी आदेश में कहा है कि इंस्पेक्टर/मामले के विवेचक की यह रिपोर्ट संतोषजनक नहीं लग रही। चूंकि अदालत ने पहले भी 9 फरवरी व 7 मार्च को आदेश दिए थे। उस समय तक यह कार्रवाई पुलिस स्तर से गोशाला संचालक पर क्यों नहीं की गई? अब जब स्पष्टीकरण दिया गया, तभी यह कार्रवाई की गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि मामले में कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में कोतवाल/मामले के विवेचक पर जांच कराई जाए। एसएसपी प्रकरण की जांच आख्या एक सप्ताह में न्यायालय में भेजें। इधर, बता दें कि इस मामले में एसएसपी स्तर से सीओ द्वितीय को मंगलवार को ही जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।