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दीनदयाल कोविड अस्पताल के गंभीर मरीज आखिर कहां जाएं

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय (एल-2) के गंभीर मरीजों को आखिर कहां रेफर किया जाए। यह बड़ा सवाल है और इसका जवाब चिकित्सक भी तलाशने लगे हैं। नियम भी जटिल हैं कि किसी मरीज को रेफर करना आसान नहीं होता। जनपद में एल-3 अस्पताल भी नहीं है।
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अप्रैल माह में आए दिन मरीजों की मौत की सूचना आ रही है। यह अलग बात है कि आरटीपीसीआर रिपोर्ट के आधार पर मरीजों को कोविड निगेटिव या पॉजिटिव माना जाता है। एल-3 अस्पताल को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय एवं जिला प्रशासन भी चुप्पी साध लेता है। जबकि अभी वक्त लोगों की जिंदगी बचाने के लिए ईमानदार कोशिश करने की है।
कोविड अस्पताल के चिकित्सक कहते हैं कि पं. दीनदयाल अस्पताल एवं जेएन मेडिकल कॉलेज को एल-2 का दर्जा प्राप्त है। दीनदयाल अस्पताल की तुलना में जेएन मेडिकल कॉलेज को एल-3 बनाया जा सकता है, वहां पर विशेषज्ञ प्रोफेसर, रीडर, रेजीडेंट डॉक्टर और उच्च प्रशिक्षित तकनीकी क्षमता है। आईसीयू से लेकर सभी तरह के ऑपरेशन संभव हैं।
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चिकित्सक मान रहे हैं कि दूसरी लहर में ज्यादा गंभीर मरीज आ रहे हैं। गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए जनपद में एल-3 अस्पताल की सख्त जरूरत है। एडी हेल्थ डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि अलीगढ़ में एल-3 अस्पताल से संबंधित मामले को देखता हूं। प्रयास करूंगा कि यह कैसे संभव हो सकता है।
80 मरीज ऑक्सीजन पर, जेएन मेडिकल कॉलेज में मात्र एक
पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय (एल-2) में 80 मरीज ऑक्सीजन पर हैं। जबकि जेएन मेडिकल कॉलेज में मात्र एक मरीज ऑक्सीजन पर है। यह संख्या शनिवार का है। इसी महीने की पहली तारीख को दीनदयाल अस्पताल में मात्र तीन मरीज ऑक्सीजन पर थे। जेएन मेडिकल में तो पहली तारीख को एक भी मरीज ऑक्सीजन पर नहीं था। उस समय पेसेंट रिकवरी रेट 99.21 प्रतिशत थी। जबकि वर्तमान में रिकवरी रेट 96.10 प्रतिशत है।
मौत की संख्या बताने में कतराते हैं अधिकारी
मौत का सही आंकड़ा बताने में पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कतराते हैं। उनका कहना है कि इसके लिए वे लोग अधिकृत नहीं है। सीएमओ ऑफिस या प्रशासनिक स्तर से भी दीनदयाल अस्पताल में मरने वालों की संख्या की जानकारी नहीं दी जाती है। इसकी वजह से भ्रामक सूचनाएं विभिन्न माध्यम से लोगों तक पहुंच रही है।
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