अलीगढ़, आगरा एवं बरेली की मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में मौजूद किसान।
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खरीफ गोष्ठी के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ं के सामने किसानों ने अपनी बेकदरी बयां की तो अफसर बगलें झांकते नजर आए। किसानों ने अफसरों के सामने समस्याओं की झड़ी लगा दी। इस बीच अफसरों ने खामियों को छिपाने और नाराज किसानों को साधने का भरसक प्रयास किया।
ब्रह्मपुरी (कासगंज) निवासी किसान संजीव शर्मा ने कहा कि प्रदेश में असलाह का लाइसेंस बनवाना आसान है, लेकिन जैविक खेती के प्रमाण पत्र पाने की प्रक्रिया काफी मुश्किल है। इसके लिए दो साल से अफसरों के यहां चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जैविक खेती का प्रमाण पत्र लखनऊ और गाजियाबाद में बनते हैं। बिना प्रमाण पत्र के जैविक उत्पाद का अच्छा बाजार मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
अलीगढ़ के किसान आरके पचौरी ने ऋण मिलने में हो रही समस्या को रखा। भारतीय किसान संघ के चौधरी गुलवीर सिंह ने बीज अनुदान का पैसा न मिलने और आलू भंडारण का किराया तय न होने का मुद्दा रखा। एटा के किसान विनोद चौहान ने किसान उत्पादन संगठन (एफपीओ) के साथ नियमित बैठक करने की बात कही। हाथरस के किसान धीरेंद्र सिंह ने सोलर पंप का बीमा । आगरा के किसान विशंभर सिंह चाहर ने नहरों में गंगाजल बढ़ाने और पर्याप्त मात्रा में आलू बीज उपलब्ध कराने की बात रखी। बरेली के सर्वेश कुमार ने जैविक उत्पादों की गुणवत्ता प्रयोगशाला खोलने तथा बहेड़ी के किसान राकेश गंगवार ने चीनी मिल पर किसानों का 250 करोड़ रुपये बकाया होने की बात कही। पीलीभीत के किसान भुवनेश कुमार ने गन्ने में फंगस से बचाव के लिए बायो पेस्टीसाइड्स बनाने। बदायूं के वीरेश तोमर ने एफपीओ को एनआरएलएम समूहों से जोड़ने का सुझाव रखा। मैनपुरी के सिराज अहमद, पीलीभीत के कृष्ण कुमार, बरेली के सीताराम, कासगंज के हरदेव शर्मा, अलीगढ़ केे भंवरपाल सिंह, राकेश देशराजन ने भी दर्द बयां किया। उधर, भाकियू (हरपाल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने मंच पर किसानों को स्थान न देने पर नाराजगी व्यक्त की है।