पद्मभूषण गोपालदास नीरज जी की अंतिम यात्रा में उनके सदाबहार गीत गूंजते रहे। जनकपुरी से नुमाइश मैदान स्थित कृष्णांजलि सभागार और वहां से नुमाइश मैदान स्थित शमशान गृह तक नीरज ही नीरज सुनाई देता रहा। जनकपुरी स्थित उनके आवास से अंतिम यात्रा फूलों और तीन रंगों के गुब्बारों से सजे एक बड़े ट्रक से शुरू हुई। इसमें नीरज जी की एक बड़ी फोटो भी लगाई गई थी। इसके आगे एक और मिनी ट्रक चल रहा था।
फूलों से सजे इस मिनी ट्रक पर नीरज के प्रशंसक ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, नीरज जी का नाम रहेगा..। नीरज जी अमर रहें.. के नारे बुलंद कर रहे थे। इस ट्रक पर नीरज की एक सीडी लाउडस्पीकर की आवाज बन कर गूंज रही थी। जिसमें मशहूर रेडियो उद्घोषक अमीन सायनी की जानी पहचानी आवाज में नीरज का परिचय सुनाते हुए उनके कुछ चुनिंदा गीत सुनवाए जा रहे थे। जिसमें फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ का लोकप्रिय गीत ‘फूलों के रंग से, दिल की कलम से, तुझको लिखी रोज पाती, कैसे बताऊं, पल-पल मुझे तू सताती, तेेरे ही सपने लेकर सोया, तेरी ही यादों में जागा, तेरे ख्यालों में उलझा रहा यूं, जैसे कि माला में धागा, बादल- बिजली, चंदन-पानी जैसा अपना प्यार.. लेना होगा जन्म, हमें कई कई बार...।
रंगीला रे.. तेरे रंग में यूं रंगा है मेरा मन..। सहित कई अन्य गाने गूंजते रहे। इन गानों की मधुर धुनों के बीच निकलती नीरज की अंतिम यात्रा हर किसी की आंखें नम कर गईं। यात्रा जनकपुरी से मैरिस रोड, वहां से सेंटर प्वाइंट, सेंटर प्वाइंट से घंटाघर, घंटाघर से जिलाधिकारी आवास नगर निगम सेवा भवन के सामने से गुजरी। इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम के सामने से यात्रा राजा महेंद्र सिंह पार्क तस्वीर महल आ गई।
तस्वीर महल से जेल रोड ओवरब्रिज होते हुए काफिला नुमाइश रोड पर पहुंचा। यहां से तहसील कोल तिराहे से नुमाइश मैदान के कृष्णांजलि सभागार की ओर मुड़ गया। यात्रा में कई जगहों पर फूलों की बारिश की गई। कई गीत प्रेमियों और साहित्यप्रेमियों ने उनको श्रद्धा के साथ विदाई दी। तकरीबन सवा घंटे में इस काफिले ने जनकपुरी से नुमाइश मैदान तक सफर तय किया।
कृष्णांजलि सभागार में उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। ये वही जगह थी जहां वो अक्सर आन, बान और शान से कवि सम्मेलनों और अन्य कार्यक्रमों की अध्यक्षता करते थे। दरअसल, अंतिम यात्रा नीरज की इच्छा के अनुसार ही एक जश्न में बदल गई थी। जिसमें उनके गीतों के शब्दों में पिरोई जाने वाली नश्वरता भी साथ हो गई थी, नीरज जी अक्सर कहते थे कि प्यार अमर है..। अंतिम यात्रा में शामिल हरेक शख्स भी नीरज के इसी अमर प्यार से बंधा था... सब यही चाहते थे कि फिर एक नीरज हो..। जो अपने चाहने वालों से कहे... बादल-बिजली, चंदन-पानी जैसा अपना प्यार.. लेना होगा जनम, हमें कई कई बार...।
प्रशासनिक अमला मौजूद रहा
नीरज जी की अंतिम यात्रा में एडीएम सिटी एसबी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट सचिन कुमार, एसपी सिटी अतुल कुमार श्रीवास्तव, सीओ प्रथम विशाल पांडेय, सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव, सीओ तृतीय संजीव दीक्षित, इंस्पेक्टर क्वार्सी रवींद्र सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस विनोद कुमार, इस्ंपेक्टर बन्ना देवी राघवेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर अकराबाद संजीव दुबे के साथ आरएएफ और अन्य पुलिस बल साथ रहा। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सपा के कई स्थानीय नेता, समाजसेवी, साहित्यप्रेमी और अन्य लोग यात्रा में शामिल हुए। पुलिस ने यात्रा के रूट से जुड़ने वाले अन्य रास्तों को बंद कर दिया था ताकि कहीं जाम न लगे।