विभाग के लैब में दो एनारोबिक बायोरिएक्टर लैंडफिल विकसित किए गए। एक में कच्चा व ठोस कचरा भरा गया, जबकि दूसरे में विंडरो कंपोस्ट डाला गया, जिसे अलीगढ़ स्थित एक अपशिष्ट उपचार संयंत्र से लिया गया था। दोनों बायोरिएक्टरों को 300 दिनों तक एनारोबिक परिस्थितियों में संचालित किया गया। अध्ययन में सामने आया कि कचरे का स्थिरीकरण लगभग आधे समय में हो गया, जबकि कच्चे कचरे को स्थिर होने में अधिक समय लगा।
बायोरिएक्टर लैंडफिल से ईटीपी से निकलने वाले पानी से प्रदूषण हटाए जाते रहे हैं। पहली बार कचरे के प्रबंधन को लेकर उसका इस्तेमाल किया गया है। प्रो. आसिफ अली सिद्दीकी ने इंग्लैंड में बायोरिएक्टर लैंडफिल से कचरा प्रबंधन पर काम किया है। इसलिए देश में उन्होंने इस पर शोध कराया है। देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक गंभीर चुनौती है। इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू किए जाने की जरूरत है।-प्रो. सुहैल अयूब, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, एमएयू