पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने कहा है कि हम हिंदू भाईयों को नाराज कर सड़क पर नमाज नहीं पढ़ना चाहते हैं। परंपरागत ईद, बकरीद, अलविदा जुमे की नमाज से किसी को दिक्कत नहीं है। इस मामले में डीएम से मुलाकात करते हुए पूर्व विधायक ने दार्शनिक लहजे में कहा कि इबादत से अगर किसी को तकलीफ होती है तो इबादत का क्या फायदा। हम शासन के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं।
आम दिनों में नमाज मस्जिद के अंदर ही पढ़ी जाएगी। जहां तक हनुमान चालीसा का सवाल है तो हिंदू भाई हमारी गली, सड़क, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, हवाई अड्डे या किसी भी स्थान पर हनुमान चालीसा पढ़े, हमें आपत्ति नहीं है। भगवान का नाम ही तो ले रहे हैं, अच्छा है। इससे भगवान खुश होंगे और प्राकृतिक आपदाओं से सभी की रक्षा करेंगे। जोर देकर कहा कि हम चैलेंज करने वाले नहीं हैं, हम प्रधानमंत्री मोदी के सबका साथ सबका विकास के नारे से सहमत हैं और हर तरह से शासन प्रशासन को सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
'मुसलमानों से ज्यादा हिंदू करते हैं सड़कों पर धार्मिक जलसे'
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अलीगढ़ मंडल अध्यक्ष डा. रक्ष्पपाल सिंह ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों से कुछ अति उत्साही लोग शहर और जिले के साथ पूरे प्रदेश में शांति व्यवस्था में खलल डालने के लिए नमाज और चालीसा की आड़ ले रहे हैं। ये वह लोग हैं जिनको भाजपा सरकार में कोई पूछ नहीं रहा है। ऐसे लाग अपनी पूछ बनाने के लिए इस तरह का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, जो कभी सफल नहीं हो जाएगा। हिंदू हो या मुसलमान सभी जानते हैं कि किसी क्या आवश्यकता है।
सड़क पर नमाज केवल ईद बकरीद या जुमे के दिन होती है। इससे उलट हिंदूओं की यात्राएं, जुलूस, धार्मिक आयोजन से लेकर रामलीला तक तमाम जगह सड़कों पर होती है। जिसके लिए बाकायदा यातायात बदला जाता है। यह सब कई दशकों से हो रहा है। इसलिए सड़क पर नमाज या धार्मिक कार्यक्रमों की आड़ में नेतागिरी करने का कोई मतलब नहीं है।