जिला अस्पताल की ओपीडी में 4 नवंबर को बाल रोग विभाग में 250 से अधिक मरीज आए। इनमें 180 बच्चे वायरल बुखार से ग्रस्त थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वैभव जैन ने बताया कि इस मौसम में बच्चों में तेज बुखार और पेट दर्द की समस्या सबसे अधिक है। तेज बुखार में बच्चे का शरीर गुनगुने पानी से साफ करें। इससे रक्त कोशिकाओं की सिकुड़न कम होती है। रक्त संचार तेजी से होता है। तापमान भी कम कम होता है। बच्चों को प्रदूषण से दूर रखें। तरल पदार्थों का सेवन करें। गर्म कपड़े पहनाएं।
घरों के आसपास पानी एकत्रित न करें : सीएमओ
सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने कहा है कि ये मौसम डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और वायरल बुखार के लिए अनुकूल है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है, इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में घरों के बाहर सीमेंटेड हौदी में पानी भदा रहता है। जिससे मच्छरों का लार्वा पनप रहा है। पानी को जमा न होने दें। बुखार होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।
इसका रखें ख्याल
-ठंडे पदार्थ खाने पीने से बचें।
-मच्छरों से बचाव करें।
-पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
-बुखार आने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
-चिकित्सीय परामर्श से ही दवा लें।
वायरल में दी जाने वाली दवाएं
-बुखार के लिए पैरासिटामोल
-खांसी-जुकाम में लिवोसिटराजिन
-एंटीबॉयोटिक में अजीथिरोमाइसिन, सिफेक्सिम
-खांसी के लिए कफ सिरप