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चंदपा प्रकरण ः गांव के सभी लोग चाहते हैं जल्द स्वस्थ होकर लौटे बिटिया

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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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जिला मुख्यालय के करीब दस किमी की दूरी पर चंदपा क्षेत्र का जो गांव इस समय चर्चित बना हुआ है, उसमें पिछले कई दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है। बुजुर्ग कहते हैं कि उन्होंने अपने गांव में इतनी पुलिस और पीएसी तो चुनाव के समय में भी नहीं देखी। कम आबादी वाले इस गांव के लोगों के दिल-ओ-दिमाग पर एक अनजाना खौफ घर किए हुए है। सभी यह चाहते हैं कि सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई अनुसूचित परिवार की यह बेटी जल्द स्वस्थ होकर लौट आए।
करीब 400 मतदाताओं और करीब साढ़े सात सौ आबादी वाला यह गांव इस समय एक घटना के बाद खासा चर्चित बना हुआ है। यदि जाति के हिसाब से स्थिति देखें तो गांव में चार अनुसूचित जाति के हैं। आठ परिवार पिछड़ा वर्ग के हैं और शेष ठाकुर और ब्राह्मण परिवार इस गांव के निवासी हैं। अनुसूचित जाति की ही एक बिटिया के साथ दरिंदगी हुई है। पीड़िता के पिता के पास पांच बीघा आवंटन की भूमि है। इस जमीन के अलावा यह परिवार मेहनत, मजदूरी पर अपनी गुजर-बसर करता है।
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पीड़िता का पक्का मकान है। उसकी दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। उसके परिवार में माता-पिता व दो भाई भी हैं। गांव में घुसते ही अनुसूचित जाति व उसके सामने ठाकुर जाति के लोगों के घर हैं। आरोपियों में तीन एक ही परिवार के हैं, जबकि चौथा आरोपी दूसरे परिवार का है। यह चारों परिवार मध्यमवर्गीय हैं और इनके पास अपनी जमीन भी है। वे भी खेतीबाड़ी के साथ-साथ प्राइवेट नौकरी करते हैं। 14 सितंबर को जब इस युवती पर जानलेवा हमला हुआ तो गांव को लोगों को यह उम्मीद नहीं थी कि यह मामला इतना तूल पकड़ जाएगा और इतना चर्चित हो जाएगा। अब पिछले एक सप्ताह से गांव में पुलिस बल और पीएसी ने डेरा जमाया हुआ है।
जाति के नाम पर द्वेष कभी नहीं रहा
गांव के निवासी कहते हैं कि इस गांव में छोटी-छोटी घटनाएं तो हुई हैं, लेकिन इतनी बड़ी घटना नहीं हुई। वे कहते हैं कि कुछ लोगों की वजह से गांव का माहौल बिगड़ा है। राजनेता भी बिना वजह मामले को तूल दे रहे हैं। यहां जाति, बिरादरी के बीच द्वेष जैसी कोई बात कभी नहीं रही। हमेशा एक दूसरे ने एक दूसरे का सहयोग किया है।
जब लोगों ने घेरा थाना, तब बढ़ाई गई थी दुष्कर्म की धारा
चंदपा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की युवती के साथ हुए इस जघन्य कांड की शुरुआत 14 सितंबर से हुई। इस दिन गांव के वाल्मीकि परिवार की युवती जब खेत पर चारा काटने गई तो उस पर जानलेवा हमला हुआ। उसकी गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया गया। जीभ काटी गई और रीढ़ की हड्डी भी तोड़ी गई। ऐसी स्थिति में उसे पहले जिला अस्पताल लाया गया और वहां से उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। पुलिस ने युवती के भाई की तहरीर पर गांव के एक युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। उसकी गिरफ्तारी भी कर ली गई।
इसके बाद यह मामला तूल पकड़ गया। वाल्मीकि समाज इस परिवार के साथ एकजुट होने लगा। वहीं यह युवती की हालत और बिगड़ गई। वाल्मीकि समाज के लोगों ने 21 सितंबर को थाना हाथरस कोतवाली सदर का घेराव
किया और वहां पहुंचकर अधिकारियों को ज्ञापन दिया। इन लोगों का आरोप था कि पुलिस ने इस मामले की रिपोर्ट केवल जानलेवा हमले में दर्ज की है, जबकि इस पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म भी हुआ है। इसके बाद बड़े पुलिस अधिकारी भी चेते।
पुलिस ने इस मामले में पहले छेड़खानी की धारा बढ़ाई और तदुपरांत पीड़िता के बयान के आधार पर तीन अन्य युवकों के नाम जोड़े। इस तरह जानलेवा हमले के साथ-साथ इसमें सामूहिक दुष्कर्म की धारा भी बढ़ा दी गई। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। इस मामले में तत्कालीन कोतवाली निरीक्षक चंदपा डीके वर्मा पर लापरवाही के आरोप लगे तो एसपी ने तीन पहले कोतवाली निरीक्षक को भी लाइन हाजिर कर दिया। मामले में चूंकि सियासत गरम हो गई तो आनन-फानन में प्रशासन ने भी इस पीड़िता के परिवार को 4.12 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी दे दी।
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विपक्षी तूल देने में जुटे, भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी
यदि इस मामले में सियासत की बात करें तो जैसे ही यह बात सामने आई कि एक वाल्मीकि परिवार की युवती के साथ इस तरह की दरिंदगी हुई है और विपक्षी दल इसे मुद्दा बना रहे हैं तो भाजपा इसे डैमेज कंट्रोल करने में जुट गई। सप्ताह भर पहले भाजपाई पीड़िता के परिवार के यहां गए। उसके बाद सांसद भी उसके घर पहुंचे। अधिकारियों से वार्ता भी की। इसी दौरान कांग्रेस, बसपा और आप के नेताओं ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज और बिटिया के गांव में चक्कर लगाने शुरू कर दिए। मामले ने और ज्यादा तूल तब पकड़ लिया, जब भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने ट्वीट कर यह कहा कि अब रविवार को वह अलीगढ़ अपनी बहन को देखने जाएंगे। चंद्रशेखर के आने पर यह मामला और ज्यादा गंभीर हो गया। इसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती का भी ट्वीट आया और उन्होंने भी अपने प्रतिनिधि के रूप में सोमवार को गयाचरण दिनकर को भेजा। इस घटनाक्रम के बाद सियासत अभी जारी है।
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