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1962 का विधानसभा चुनाव... यूपी में बनी कांग्रेस सरकार, जिले में मिली हार

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अभिषेक शर्मा
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अपने जिले की सियासी तासीर आजादी के बाद से बेहद दिलचस्प रही है। यहां जातीय समीकरण और ध्रुवीकरण शुरू से हावी रहा है। इसी का परिणाम रहा कि तीसरी विधानसभा के लिए 1962 में हुए चुनाव में यूपी में 249 विधायकों के दम पर कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी मगर इस जिले में विरोधियों के गठजोड़ के मुकाबले कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और 10 में से मात्र तीन हाथरस, सासनी और गंगीरी विधानसभा सीट पर ही कांग्रेस जीत सकी। हालांकि इस चुनाव में जनसंघ ने कोई सीट नहीं जीती मगर अधिकांश सीटों पर दूसरे स्थान पर रहकर अपनी ताकत का अहसास कराया। साथ में जिले में रिपब्लिकन पार्टी द्वारा बनाए गए दलित-मुसलिम गठजोड़ ने कांग्रेस को हार का मुंह दिखाते हुए खुद दो सीटें जीतीं। इतना ही नहीं, इसी चुनाव के साथ लोकसभा का चुनाव हुआ और जिले के दोनों लोकसभा क्षेत्र अलीगढ़ व हाथरस पर भी रिपब्लिकन पार्टी ने जीत दर्ज की।
नौ पंजीकृत दलों ने यूपी में लड़ा तीसरा चुनाव
1962 के चुनाव में नौ राजनीतिक दल पंजीकृत थे, जिनमें स्वतंत्रता पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, जनसंघ, कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी, रामराज्य परिषद, रिपब्लिकन पार्टी, हिंदू महासभा प्रमुख हैं। इनमें से कांग्रेस ने यूपी की 430 में से 249 सीटें जीतीं, जिनमें से अलीगढ़ में तीन, रिपब्लिकन पार्टी ने यूपी में कुल आठ सीट जीतीं। इनमें अलीगढ़ में दो सीट थीं। वहीं प्रदेश में कुल 31 निर्दल जीते थे, जिनमें से अलीगढ़ में तीन निर्दलीय विधायक थे।
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रिपब्लिकन, जनसंघ और निर्दलों ने कांग्रेस को ऐसे दी टक्कर
उस समय खैर के रहने वाले एएमयू में विधि विभाग के अनुसूचति प्रोफेसर बुद्धप्रिय मौर्य डॉ. बीआर आंबेडकर की रिपब्लिकन पार्टी में सक्रिय थे। उन्होंने उसी पार्टी के दम पर दलित-मुस्लिम गठजोड़ कर वोटों का ध्रुवीकरण किया। वहीं जनसंघ भी उस दौर में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह की अगुवाई में बेहद सक्रिय हो गया था। साथ में सासनी क्षेत्र के गांव कौमरी के कट्टर वामपंथी नेता मुंशी गजाधर सिंह का भी जिले की सियासत पर अपना प्रभाव था। वहीं कांग्रेस के कुछ नाराज नेता भी निर्दल मैदान में कूदे थे। इस तरह जिले की सियासत में कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने की व्यूह रचना तैयार हुई। इसी का परिणाम रहा कि पिछले चुनाव तक नौ सीटों पर कब्जा जमाए जिले की 10 में से मात्र तीन विधानसभा सीट कांग्रेस जीती और दोनों लोकसभा तक हार गई।
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ये रहे दस सीटों पर परिणाम
जिले की हाथरस सीट पर 85,372 में से 42,825 वोट पड़े, जिनमें से 2800 वोट निरस्त हुए और कांग्रेस के नंद कुमार देव वशिष्ठ 11,374 वोट पाकर जीते, जबकि सीपीआई के मुंशी गजाधर सिंह 7105 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। सासनी सुरक्षित सीट पर निर्वतमान विधायक हरदयाल सिंह के निधन के बाद कोल से कांग्रेस ने रामप्रसाद देशमुख को वहां उतारा। 91,820 मतदाताओं वाली सीट पर 33,440 मत पड़े, जिनमें से विजयी रामप्रसाद देशमुख को 13351 मत मिले, जबकि रिपब्लिकन के मेवाराम 10564 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। सिकंदराराऊ पर 94,060 में से 57,157 वोट पड़े। 2,606 वोट निरस्त हुए। यहां कांग्रेस से टिकट न मिलने पर निर्दल नेकराम शर्मा 31470 वोट पाकर जीते, जबकि जनसंघ के नेम सिंह चौहान को 18424 मत मिले। गंगीरी पर 98,094 में से 55,617 वोट पड़े। कांग्रेस के श्रीनिवास को 18,323 व सोशलिस्ट पार्टी के 11,194 मत मिले। अतरौली में 97,068 में से 57,052 वोट पड़े, जिसमें सोशलिस्ट पार्टी के बाबू सिंह को 20,999 और जनसंघ के कल्याण सिंह को 13,439 वोट मिले। अलीगढ़ पर 79,205 में से 51,308 वोट पड़े, जिसमें रिपब्लिकन पार्टी के अब्दुल बशीर खां को 21,909 व कांग्रेस के अनंतराम वर्मा को 16,164 वोट मिले। कोल पर 85,638 में से 35,008 वोट पड़े, जिसमें रिपब्लिकन के भूप सिंह को 12,918 व जनसंघ के राम सिंह को 11,469 मत मिले। इगलास में 90,167 में से 45,448 मत पड़े, जिसमें निर्दल शिवदान सिंह को 9,770 व जनसंघ के सोरनलाल शर्मा को 7,693 मत मिले। खैर में 95,453 में से 53,915 मत पड़े, जिसमें स्वतंत्रता पार्टी के चैतन्य राज सिंह को 22,076 और कांग्रेस के मोहनलाल गौतम को 14,766 मत मिले। टप्पल में 97,143 में से 54,393 मत पड़े, जिसमें निर्दल महेंद्र सिंह को 13428 व प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के महावीर सिंह को 11,032 वोट मिले।
ये थे विधानसभा सीट वार विधायक
1-हाथरस-नंद कुमार देव वाशिष्ठ
2-सासनी सु.-रामप्रसाद देशमुख
3-सिकंदराराऊ-नेकराम शर्मा
4-गंगीरी-श्रीनिवास शर्मा (अब छर्रा)
5-अतरौली-बाबू सिंह यादव
6-अलीगढ़-अब्दुल बशीर खां
7-कोल सु.-भूप सिंह
8-इगलास-शिवदान सिंह
9-खैर-कु.चैतन्यराज सिंह (अब बरौली)
10-टप्पल-महेंद्र सिंह (अब खैर)
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