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वाहन चोर गिरोह के फर्जी आरटीओ का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

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वाहन चोरी कर फर्जी आरसी व बीमा के कागजात तैयार करने वाले आरोपी गिरफ्तार। - फोटो : CITY OFFICE
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संभागीय परिवहन कार्यालय के सामने साइबर कैफे की आड़ में संचालित फर्जी आरटीओ का जवां पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए चार चोरों को जेल भेजा है। गिरोह चोरी के वाहनों की फर्जी आरसी सहित फर्जी बीमा भी तैयार कर रहा था। अमर उजाला ने 23 जुलाई के अंक में इस रैकेट की खबर प्रकाशित की थी। खबर व अन्य मुखबिरों से मिली सूचना पर जवां पुलिस ने वर्कआउट किया। करीब 300 चोरी के वाहनों के फर्जी दस्तावेज बनाने का राज खुला है। रैकेट के तार पश्चिमी प्रदेश के अन्य जिलों से भी जुड़े हैं। अन्य शातिरों की तलाश की जा रही है।
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एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि जवां इंस्पेक्टर अभय शर्मा को इलाके के एक मोटर साइकिल मिस्त्री से मंगलवार को सूचना मिली थी कि एक चोरी की बाइक का सौदा हो रहा है। इस पर थाना पुलिस की टीम ने वाहन चेकिंग शुरू की। पुलिस ने शातिर गिरोह के चार सदस्यों को चोरी की मोटर साइकिलों सहित अनूपशहर रोड पर कासिमपुर तिराहे के पास से गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान प्रमोद कुमार पुत्र अर्जुन सिंह निवासी जतनपुर, चिकावटी, लोधा, सुनील कुमार पुत्र स्व. कन्हैयालाल निवासी सराय लवरिया, बन्नादेवी, मुकेश कुमार पुत्र रामसेवक निवासी नगला मसानी, देहलीगेट व लवकेश पुत्र हरी प्रकाश सिंह निवासी नगौला, जवां के तौर पर हुई है।
पूछताछ में सामने आया कि सुनील और प्रमोद आरटीओ कार्यालय के सामने साइबर कैफे चलाते हैं। मुकेश बाइक चोरी करता था। वहीं, लवकेश चोरी की बाइकों को बिकवाने के लिए ग्राहकों की तलाश कर मध्यस्ता कराता था। चोरी की गाड़ियों को सही दर्शाने का काम प्रमोद और सुनील के हवाले था। यह वाहन ट्रांसफर या अन्य किसी आरटीओ कार्यालय संबंधी रसीद कटाने आने वाले ग्राहकों का नाम, पता, उनके वाहन का नंबर व फोटो आदि रख लेते थे, जिनके आधार पर उन ग्राहकों के नाम व गाड़ी के नंबर की डुप्लीकेट आरसी बनाकर चोरी के वाहनों का नंबर आरसी पर पड़े दूसरे वाहन के नंबर के अनुसार बदलकर लोगों को बेच दिया करते थे। इसके साथ ही वाहनों के फर्जी बीमा कागजों को भी तैयार करते थे। इनके पास से एक लैपटॉप, एक कलर प्रिंटर, एक पैन ड्राइव, तीन रबड़ स्टांप (अलग-अलग बीमा कंपनियों की) तीन कूटरचित आरसी व एक बीमा पॉलिसी बरामद हुई हैं। चारों अपराधियों को जेल भेज दिया है।
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पश्चिमी यूपी के कई जिलों से जुड़े हैं तार
साइबर कैफे की आड़ में वाहनों के फर्जी दस्तावेज बनाने वाले इस गिरोह के तार न सिर्फ अलीगढ़ बल्कि पश्चिमी प्रदेश कई जिलों में फैले हैं। पुलिस के मुताबिक एक दर्जन के करीब शातिरों के नाम इस खुलासे से प्रकाश में आए हैं। उन सभी की भी ट्रेसिंग की जा रही है। जल्द ही इनको गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
कथित पत्रकार बनकर अधिकारियों पर जमाता था रौब
साइबर कैफे संचालक सुनील न सिर्फ चोरी की गाड़ियों की आरसी व फर्जी बीमा बनाने का काम करता था। बल्कि दुकान के बाहर एक मीडिया हाउस के नाम का भी बोर्ड टांग रखा था। कथित पत्रकार बनकर आरटीओ कार्यालय में अधिकारियों पर रौब जमाने से लेकर बाबुओं से फर्जी काम कराने में भी माहिर था।
सालों से चल रहा है खेल
साइबर कैफे की आड़ में वाहनों के फर्जी दस्तावेज बनाने का खेल कोई नया नहीं है। यह खेल यहां सालों से पनप रहा है। आरटीओ कार्यालय के अधिकारी इस खेल के प्रति आंखें मूंदे रहते हैं। आरटीओ कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि वाहनों की हर पांचवीं फाइल में फर्जी बीमे लगे हैं।
खुलासा करने वाली पुलिस टीम
गिरोह का खुलासा करने वाली पुलिस टीम में एसआई आदित्य शंकर तिवारी, रोहित राठी, कांस्टेबल विजय कुमार, अजय कुमार, सोनू तिवतिया, भवानी शंकर, सचिन कुमार शामिल रहे।
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