चुनाव में वैसे तो एक एक वोट महत्वपूर्ण होता है और एक-एक सीट सत्ता की कुर्सी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। हर सीट का अपना वजूद और सियासी पहचान होती है। मगर अपने जिले में विधानसभा की दो सीटें बरौली और अतरौली प्रदेश की टॉप-हॉट सूची में शामिल हैं। वजह है, यहां दो कद्दावर नेताओं की प्रतिष्ठा का दांव पर लगा होना। दोनों सत्ताधारी दल से हैं। इन दोनों ही सीटों के परिणामों का लेकर जिले के अलावा प्रदेश भर की नजर टिकी हुई है।
इनमें एक स्व. कल्याण सिंह की परंपरागत अतरौली सीट है, जहां उनके पौत्र प्रदेश सरकार में मौजूदा मंत्री संदीप सिंह बिना दादा के पहला चुनाव लड़ रहे हैं और सियासी विरासत बचाए रखने की पुरजोर कोशिश में हैं। दूसरी सीट है बरौली, जहां भाजपा के नए वीर के रूप में प्रदेश की सियासत में रसूख रखने वाले ठा.जयवीर सिंह चुनाव मैदान में हैं। बेशक ये दोनों इन सियासतदांओं की परंपरागत सीटें हैं। मगर दोनों को जातीय गणित के सहारे विपक्षी चुनौती देने में जुटे हैं। जिसके दम पर अतरौली पर जरूर टक्कर आमने-सामने की बनती नजर आ रही है। वहीं, बरौली पर त्रिकोणीय मुकाबले से भाजपा के नए वीर जूझ रहे हैं।
अतरौली ---
अतरौली के जिक्र के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री स्व.कल्याण सिंह का नाम खुद ब खुद जेहन में कौंध जाता है। अपने दादा की सियासी विरासत संभाल रहे कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह में युवा होने के नाते कुछ कर गुजरने का जज्बा भी दिखाई देता है। उनको सीधी चुनौती इस क्षेत्र के दूसरे सियासी घराने से ताल्लुक रखने वाले पूर्व विधायक वीरेश यादव दे रहे हैं, जो 2012 के चुनाव में संदीप की मां को हराकर इस सीट से विधायक रह चुके हैं। बात अगर विकास और मुद्दों की करें तो क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछा है। क्षेत्र के युवाओं में बस एक मलाल है कि रोजगार के लिए पलायन क्यों? इसके अलावा, सरकार विरोधी मुद्दे ज्वलंत हैं, जिनके दम पर विपक्ष चुनाव मैदान में वोटरों की नब्ज पर हाथ रखने को प्रयासरत है। मौजूदा विधायक संदीप प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अपने दादा कल्याण सिंह के नाम पर और खुद के पांच साल के कामकाज के सहारे मैदान में हैं। हालांकि वोटों के जातीय गणित के आधार पर लड़ाई भाजपा और सपा में दिखाई दे रही है। इनके बीच कांग्रेस से धर्मेंद्र लोधी व बसपा से डॉ. ओमवीर लोधी घुसपैठ के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। जातीय गणित की बात करें तो यहां यादव व लोधी बराबर-बराबर हैं। जाट, ब्राह्मण, वैश्य, मुसलिम, जाटव व अन्य एससी-बीसी वोटों में अपनी पकड़ के लिए सभी दलों के अपने-अपने प्रयास प्रचार के अंतिम दौर तक जारी हैं। यहां के मतदाताओं के अपने-अपने दावे हैं। गांव बिजौली के हरिओम शर्मा आवारा जानवरों से नुकसान को बड़ा मुद्दा बताते हैं। नानक राजपूत मौजूदा सरकार के विकास के सहारे फिर से भाजपा को जरूरत बताते हैं।
बरौली --
शहर से सटी ठाकुर बहुल इस सीट का जिला व प्रदेश की सियासत में हमेशा से खासा दखल रहा है। यहां किसी दल विशेष का कभी महत्व न रहकर व्यक्ति विशेष का दखल रहा है। 90 के दशक से पहले की सियासत पर गौर करें तो यहां 70 व 80 के दशक में कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह चौहान और जनता पार्टी के संग्राम सिंह के बीच टक्कर रहा करती थी। सुरेंद्र सिंह चौहान का कद था कि वे प्रदेश सरकार में जेल, न्याय, विधि और गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उनके बाद आज तक प्रदेश में गृह मंत्रालय किसी मंत्री को नहीं मिला, बल्कि खुद मुख्यमंत्री के ही पास रहता आया है। 90 के दशक में छात्र राजनीति से ब्लाक प्रमुख बने दलवीर सिंह ने सुरेंद्र सिंह चौहान को हराकर इस सीट पर नया इतिहास लिखा। 1996 में चुनाव जीतकर वे प्रदेश में मंत्री बने। उनके सामने 2000 में बसपा से ठा.जयवीर सिंह सक्रिय हुए और दो बार 2002 व 2007 में जयवीर ने दलवीर को हराया। दोनों बार वे मंत्री भी बने। राम लहर में 1993 जरूर इस सीट पर भाजपा के मुनीष गौड़ विधायक बने। कुल मिलाकर यहां हमेशा दो खेमे रहे हैं और दो प्रत्याशियों के बीच ही लड़ाई रही है। इस बार भाजपा से मौजूदा विधायक का टिकट कटने पर भाजपा के नए वीर के रूप में प्रदेश में एमएलसी ठा.जयवीर सिंह मैदान में हैं। उनके सामने दूसरा वीर तो नहीं, मगर रालोद के अनुभवी रणनीतिकार प्रमोद गौड़ व बसपा के नए चेहरे नरेंद्र शर्मा ने ताल ठोक रखी है। जातीय गणित व मुद्दों के सहारे ये दोनों भाजपा को तगड़ी चुनौती दे रहे हैं। जयवीर सिंह का इस सीट को लेकर तगड़ा अनुभव है। वे अपने अनुभव के आधार पर सियासी रण जीतने को प्रयासरत हैं। यहां के युवा चेहरे पौहिना के नरेंद्र पचौरी कहते हैं कि भाजपा की लहर है। वहीं गभाना के विपिन जादौन कहते हैं कि जातीय गणित अभी तस्वीर साफ नहीं कर रहा है।
--ये धुरंधर मैदान में--
-अतरौली विस क्षेत्र से-
-संदीप सिंह- भाजपा, वीरेश यादव- सपा, डॉ.ओमवीर सिंह-बसपा, धर्मेंद्र सिंह लोधी-कांग्रेस।
-बरौली विस क्षेत्र से-
-ठा.जयवीर सिंह-भाजपा, प्रमोद गौड़- रालोद, नरेंद्र शर्मा-बसपा, गौरांग देव चौहान-कांग्रेस।