अलीगढ़ के बन्नादेवी इलाके के मेलरोज बाईपास केवल विहार इलाके में हुए तीहरे हत्याकांड में शनिवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। पत्नी-बेटा और किरायेदार महिला की हत्या के दोषी सेवानिवृत्त फौजी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
अदालत ने अपने फैसले में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हत्याकांड के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उनके अंगरक्षकों को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस प्रकरण में पिता ही अपने परिवार का रक्षक व संरक्षक होता है। उसके द्वारा पत्नी व बेटे की हत्या कर दी गई। यह मानवता को शर्मशार करने वाला अपराध है।
अदालत ने कहा कि इसमें मृत्युदंड के अलावा कोई विकल्प अथवा दंड नहीं है। तिहरे हत्याकांड के 55 पेज के फैसले में अदालत ने महान दार्शनिक व अर्थशास्त्री एडम स्मिथ के इस संदेश का हवाला दिया- 'दोषी के प्रति दया दिखाना निर्दोष के प्रति क्रूरता है'।
दस वर्ष चले सत्र परीक्षण में बचाव पक्ष की ओर से बेटी के घायल होने की बात को मनगढ़ंत कहानी होने का दावा किया गया। मगर बेटी की गवाही और पुलिस के सबूतों के आगे बचाव पक्ष की दलील न टिकीं और अदालत ने इस वारदात को विरलतम करार देकर फैसला सुनाया।
दस साल चला ट्रायल, नौ गवाह पेश
इस मुकदमे का ट्रायल 29 जनवरी 2015 को शुरू हुआ, जो दस वर्ष चला। इसमें कुल नौ गवाह के तौर पर पहले वादी, घायल बेटी, मुकदमा लेखक सिपाही, तत्कालीन एसएचओ प्रथम विवेचक रवि त्यागी, एसआई पीपी माथुर व एसएस मिश्रा, पीएम करने वाले डॉ. संतोष कुमार, बच्ची का उपचार करने वाले डॉ. पारितोष मोहन, दूसरे विवेचक एसएचओ अरविंद कुमार पेश किए गए। इसके अलावा 22 दस्तावेजी साक्ष्य व 16 बरामद साक्ष्य पेश किए गए।
ये भी हैं अदालत की टिप्पणियां
इस फैसले को लेकर जानकारी देते हुए एडीजीसी मेपे सिंह बताते हैं कि अदालत ने फैसले पर कई टिप्पणियां की हैं। जिसमें कहा है कि ऐसा व्यक्ति जो अपनी पत्नी व सात वर्ष का अबोध बालक, जो अपनी रक्षा करने में स्वयं सक्षम नहीं था, की हत्या कर सकता है। वह समाज में किसी छोटी बात पर किसी भी व्यक्ति की हत्या कर सकता है।
ऐसे व्यक्ति की समाज में लेश मात्र भी आवश्यकता नहीं है, उसे समाज से हटा देना चाहिए। इससे पहले यह भी माना है कि अगर वह न पकड़ा जाता तो निश्चित रूप से अन्य कई व्यक्तियों की हत्या किए जाने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में ऐसा दंड दिया जाना चाहिए, जिससे न सिर्फ अभियुक्त, अपितु समाज में भी ऐसा संदेश जाए कि ऐसा करने वाले का अंजाम कैसा होता है। कोई भी इस प्रकार हैवान बनने की चेष्टा करेगा तो उसे कठोर दंड मिलेगा।
ये भी अदालत के आदेश में
अदालत ने अपने आदेश में तिहरे हत्याकांड के लिए फांसी और एक लाख रुपये अर्थदंड लगाने के अलावा बेटी पर हमले के लिए दस वर्ष कैद एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड भी तय किया है। अर्थदंड की अस्सी फीसदी राशि बच्ची को दी जाएगी। सभी सजाएं साथ चलेंगी। आदेश पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा जाएगा। दोषी तीस दिन में अपील दायर कर सकेगा। आदेश की प्रति डीएम को भी भेजी जाएगी।
पत्नी-बेटा और किरायेदार महिला की हत्या में सेवानिवृत्त फौजी को फांसी
अलीगढ़ के बन्नादेवी इलाके के मेलरोज बाईपास केवल विहार इलाके में हुई पत्नी-बेटा व किरायेदार महिला की हत्या के दोषी सेवानिवृत्त फौजी को फांसी की सजा सुनाई गई है। 11 वर्ष पुराने बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में यह फैसला शुक्रवार को एडीजे-द्वितीय पारुल अत्री की अदालत ने सुनाया है।
अदालत ने सवा लाख रुपया अर्थदंड भी नियत किया है और इस दौरान हमले में घायल हुई बेटी को अर्थदंड की राशि में से 80 फीसदी राशि के भुगतान का आदेश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में इस वारदात को विरलतम अपराध की संज्ञा देते हुए फैसला सुनाया है। फैसले के बाद हत्यारे के पैरों तले जमीन खिसक गई और बाद में उसे पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये घटना 12 जुलाई 2014 की दोपहर करीब ढाई बजे की है। बन्नादेवी में मुकदमा दर्ज कराते हुए वादी मुकदमा लोधा के गांव बरौठ छजमल निवासी शिक्षक दिलीप सिंह ने कहा कि उनकी बहन सीमा व बहनोई मनोज कुमार सिंह निवासी ग्राम हरतौली कोतवाली देहात बुलंदशहर की शादी घटना से पंद्रह वर्ष पहले हुई। वर्तमान में मनोज अपनी पत्नी सीमा, बेटी उस्मिता व बेटे मानवेंद्र के साथ केवल विहार कॉलोनी में अपने बहनोई के मकान में किराये पर रहते हैं।
घटना वाले दिन मनोज ने अपने लाइसेंसी हथियारों से गोली मारकर पत्नी सीमा, बेटे मानवेंद्र की हत्या कर दी, जबकि बेटी उस्मिता गोली लगने से घायल हो गई। इस दौरान बचाने आई इसी मकान में किरायेदार दूसरी महिला शशिबाला की भी गोली मारकर हत्या कर दी।
इसी बीच फायरिंग पर एकत्रित हुई भीड़ ने घर से भागते समय आरोपी को हथियारों सहित पकड़ लिया और घायल उस्मिता को अस्पताल भेजा गया। आरोप के अनुसार मनोज आए दिन छोटी छोटी बातों पर पत्नी, बेटा व बेटी को पीटता था। जिसकी शिकायत भी सीमा ने अपने मायके वालों से की।
मगर वह अपनी आदतों से बाज नहीं आया। उसने इस वारदात को अंजाम दे डाला। मामले में पुलिस ने मुकदमे के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी, पोस्टमार्टम आदि की प्रक्रिया पूरी कर चार्जशीट दायर की।
कोर्ट की टिप्पणी
प्रस्तुत प्रकरण में अभियुक्त ने जो कृत्य किया है, वह मानवता को शर्मशार करने वाला है। अभियुक्त का कृत्य रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। प्रकरण में अभियुक्त को मृत्युदंड देने पर ही न्याय संभव है, ताकि समाज स्वयं को और अपने बच्चों को ऐसे नर पिशाचों से बचा सके। दंड के उद्देश्य और न्याय के उद्देश्य की पूर्ति के लिए न्यायालय इस दंड का पर्याप्त आधार पाती है।