यूपी बोर्ड की परीक्षा नकल विहीन ही संपन्न करानी है। विगत वर्षों से चले आ रहे नकल के धब्बे को इस बार पूरी तरह से धोना है। आगामी समय में अगर अतरौली का नाम लिया जाए तो लोगों को लगना चाहिए की यहां किसी जमाने में नकल हुआ करती थी, लेकिन अब यहां मेहनत की दम पर ही विद्यार्थी परीक्षाओं को पास करते हैं।
यह निर्देश सोमवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा को दिए। उन्होंने कहा कि पिछली बोर्ड परीक्षा की सख्ती की वजह से ही बच्चों की संख्या में घटौती हुई है। बाहरी छात्रों ने जिले में कदम रखना बंद कर दिया है, लेकिन इस बार इस कदम को जिले से कोसो दूर ही रखना है। किसी भी प्रकार से जिले में नकल नहीं होनी चाहिए। शासन जैसा चाहता है, वैसी ही परीक्षा होनी है।
जो सहयोग आपको चाहिए वह लो, लेकिन परीक्षा नकल विहीन ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, वाइस रिकार्डर या अन्य संसाधनों में ढ़िलाई बरती जा रही है। वहां सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई अमल में लायी जाए। इसके साथ ही कहा कि जहां कहीं भी आप विकास कार्य या अन्य योजनाओं के कार्य करा रहे हैं।
उनको जनप्रतिनिधि को भी अवगत कराएं। इसी के साथ बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय से कहा कि परिषदीय विद्यालयों में अक्सर शिक्षकों के देर से पहुंचने या ना पहुंचने की सूचना मिलती है। इसलिए शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराएं।
इसके साथ ही समाजसेवियों के सहयोग से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करें। जो लोग विद्यालय के लिए विभिन्न सहयोग दे रहे हैं। उन्हें प्रोत्साहित भी किया जाए। उन्हें यह भी बताया जाए कि उनका सहयोग किस प्रकार बच्चों के भविष्य को बनाएगा। कहा कि जितनी भी योजनाएं चल रही हैं। उन्हें त्वरित गति से पूर्ण कराया जाए। कार्यों की प्रगति पत्र के माध्यम से अवगत भी कराएं।