तीन तलाक और समान नागरिक संहिता को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है। ऐसी स्थिति में गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं देश के मुस्लिम बुद्धिजीवियों के बीच गोपनीय बैठक हुई। इसमें संघ के राष्ट्रीय सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, कृष्ण गोपाल एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तथा मुस्लिम मंच के समन्वयक इंद्रेश कुमार स्वयं मौजूद थे।
इसका आयोजन नई दिल्ली के इंटरनेशनल हॉस्टल के हॉल में किया गया था। इसमें एएमयू के पूर्व कुलपति डॉ. महमदू उर रहमान एवं पूर्व रजिस्ट्रार शाहरुख शमशाद के अलावा पूर्व डीन एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य प्रो. एम शब्बीर, धर्मशास्त्र विभाग के डॉ. जाहिद ए खान के साथ-साथ शोध कर चुके पूर्व छात्र जफर दारिक आदि मौजूद रहे।
प्रो. शब्बीर का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान खुले दिल से बात हुई। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को विकास में सहभागी बनाने के लिए शिक्षा, रोजगार, विधान सभा एवं लोकसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
तीन तलाक एवं पर्सनल लॉ पर उन्होंने करीब आधे घंटे की स्पीच में 44 मुस्लिम देशों का नाम गिनाया और कहा कि वहां पर कुरान के तहत पर्सनल लॉ में सुधार हुआ है। यहां भी यह संभव है और इसका प्रस्ताव मुस्लिमों की तरफ से बनकर आए तो ज्यादा अच्छा होगा। सामान नागरिक संहिता और तीन तालाक पर भी नई बात बन सकती है।
डॉ. मुफ्ती जाहिद ने इस बात का उल्लेख किया कि हरियाणा में दंगा हुआ तो पैलेट गन का प्रयोग नहीं किया गया, जबकि कश्मीर में हुआ। इसी तरह गुजरात के सवाल पर कोई बात करने को तैयार नहीं होता। हाल के दिनों में मध्य प्रदेश में जो हुआ, उसको लेकर भी लोग तरह-तरह के सवाल उठा रहे है। इस बैठक में देश के विभिन्न प्रांतों से करीब 110 मुस्लिम बुद्धिजीवी शामिल हुए।
इसमें बड़े-बड़े अधिकारी, प्रोफेसर, विधि विशेषज्ञ से लेकर सूफी धर्म गुरु तक शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों एवं आरएसएस नेताओं के इस बैठक को बेहद गोपनीय रखा गया है। पिछले महीने कश्मीर मसले को लेकर भी दिल्ली में बैठक हुई थी, जिसमें एएमयू के कुछ बुद्धिजीवी बेहद गोपनीय तरीके से शामिल हुए थे और किसी को भनक तक नहीं लगी।