मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी एवं पैथोलॉजी सेवाएं 31 मार्च 2020 तक के लिए स्थगित कर दी गई है। इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी। सरकार ने यह फैसला भीड़ में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के खतरों को देखते हुए उठाया गया है।
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सीएमओ डॉ. गीता प्रधान ने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश पर सरकारी अस्पतालों में शनिवार से गैर जरूरी ओपीडी एवं पैथोलॉजी सेवाएं स्थगित कर दी जाएगी। अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है। इमरजेंसी व इनडोर सेवाएं जारी रहेंगी। इसके साथ ही 2 अप्रैल तक के लिए तहसील दिवस, समाधान दिवस, मुख्यमंत्री आरोग्य मेला तथा जनता दर्शन कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को लेकर लोग दहशत में है। खांसी, जुकाम एवं बुखार आदि होने पर भयाक्रांत हो जा रहे हैं। इसकी वजह से सरकारी अस्पतालों के ओपीडी एवं पैथोलॉजी सेंटर पर मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इसी खतरे को देखते हुए अलग से फीवर क्लीनिक की व्यवस्था की गई है ताकि खांसी-बुखार के मरीजों को अलग छांटा जा सके।
प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाएं देने वालों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ. जयंत शर्मा ने बताया कि डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ एवं फील्ड में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
हॉस्पिटल में रोजाना धुला हुआ गाउन, कैप, मास्क एवं दस्ताने पहनने है। प्रॉटेक्टिव चश्मा लगाना है। घर आते ही हॉस्पिटल के कपडे़ बदले, 3-4 घंटे बाद चेंबर को सैनिटाइज करें। हॉस्पिटल की रेलिंग, कुर्सियां व वर्क स्टेशन को अल्कोहल से सैनेटाइज करें। ज्यादा जरूरी न हो तो मरीज को फालोअप के लिए 15 दिन बाद बुलाएं।
मरीज के साथ चेंबर में अधिक से अधिक एक अटेंडेंट को आने दें। खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों के बैठने के लिए अलग व्यवस्था करें तथा अलग रूम में देखें। मरीज की विदेश यात्रा से आने की हिस्ट्री हो तो इसकी जानकारी मु?य चिकित्साधिकारी के आफिस में तुरंत दें। अपने डिस्पोजेलबल दस्ताने की बाहर की सतह को उतारते समय अपने शरीर से टच नहीं होने दें। मास्क को दिन में दो बार बदले और ग्लब्स को प्रॉपर तरीके से बायो मेडिकल वेस्ट नियमों के अनुसार डिस्पोज ऑफ करें।
शुक्रवार से साईं मंदिर के कपाट बंद
कोरोना वायरस का असर अब मंदिरों पर भी पड़ रहा है। वायरस से श्रद्घालुओं को बचाने के लिए सिद्धपीठ साईं मंदिर सारसौल के कपाट शुक्रवार से बंद कर दिए गए हैं। मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक अग्रिम आदेश के बाद ही मंदिर को खोला जाएगा। लोगों को एक साथ न एकत्रित होने की अपील भी की गई है। इधर प्राचीन सिद्घपीठ श्री गिलहराज हनुमान मंदिर अचल ताल में 20 से 27 मार्च तक मंदिर मात्र मंगलवार एवं शुक्रवार को सिर्फ देवदर्शन के लिए खोलने का निर्णय लिया गया है।
प्रबंधक महंत योगी कौशलनाथ ने बताया कि मंगलवार एवं शनिवार को मंदिर के द्वार सिर्फ देवदर्शन हेतु श्रद्घालुओं के लिए प्रात: 8 से 1 बजे तक व संध्या 4 से 10 बजे तक खुलेंगे। इससे पहले मंदिर परिसर को सेनेटाइज किया जाएगा। उसके उपरांत श्रद्धालुओं को पंक्तिबद्ध कर के देवदर्शन हेतु प्रवेश किया जाएगा। बाबा का चोला सिर्फ निश्चित समयानुसार प्रात:8 बजे, दोपहर 12 बजे, संध्या 4बजे व संध्या 8 बजे ही चढ़ाया जाएगा।
जिला अस्पताल में बना आइसोलेशन वार्ड
- फोटो : Amar Ujala
श्रद्धालू अपने साथ केवल सूखी चोला सामग्री, प्रसाद ही अपने साथ ला सकते हैं। 27 मार्च तक किसी भी तरह का सामूहिक सुंदर कांड पाठ, कीर्तन,भंडारा व प्रसाद वितरण स्थगित रहेगा। स्थिति सामान्य न होने पर समयावधि बढ़ाई जा सकती है। वार्ष्णेय मंदिर की प्रबंध समिति ने बताया कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान मंदिर के कपाट बंद रहेंगे।
कोचिंग संस्थान दो अप्रैल तक रहेंगे बंद
डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कोचिंग संस्थानों को दो अप्रैल तक बंद करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने कोचिंग संचालकों के साथ बैठक की।
बैठक में कोचिंग स्टेप अप के डायरेक्टर आनंद श्रीवास्तव, शैलेंद्र गर्ग, एक्सीलेंस क्लासेज के डायरेक्टर रोहित अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, बंसल क्लासेज के डायरेक्टर डॉ. रजत, पीएलएस एकेडमी के डायरेक्टर पंकज गुप्ता, आकाश इंस्टीट्यूट के ब्रांच मैनेजर सचिन, आईपीएमएस के डायरेक्टर नागेंद्र, कॉमर्स कॉम्पिटेटिव क्लासेज के डायरेक्टर मनीष, अवंती क्लासेज के सेंटर हेड जैद, दृष्टि क्लासेज के डायरेक्टर नरेश राजपूत, ब्रिक्स एकेडमी के सेंटर हेड अरुण कुमार, विनीत कोचिंग के डायरेक्टर विनीत शर्मा आदि मौजूद रहे।