नागरिकता संशोधन कानून व सीएए के विरोध में 23 फरवरी को ऊपरकोट पर हुए उपद्रव के दौरान बाबरी मंडी में जब सांप्रदायिक टकराव हुआ तो बाबरी मंडी चौकी इंचार्ज की तरह वहां तैनात आरआरएफ की प्लाटून भी मूकदर्शक बनी रही। इसीलिए उपद्रवियों के हौसले बढ़ गए और पुलिस चौकी में मौजूद स्टाफ को बंधक तक बना लिया। बाद में पहुंचे एसएसपी व उनकी टीम ने जैसे-तैसे उपद्रवियों को शांत कर पुलिसकर्मियों को बचाया था। इस संबंध में सीसीटीवी के साक्ष्य सहित पूरी रिपोर्ट आरआरएफ बटालियन मेरठ को भेजी गई है। इस संबंध में लापरवाही पर कार्रवाई वहां से हो सकती है।
23 फरवरी को जिस वक्त ऊपरकोट पर उपद्रव के बाद बाबरी मंडी में दो समुदायों में टकराव शुरू हुआ तो बाबरी मंडी चौकी इंचार्ज कपिल कुमार सहित चौकी के पुलिसकर्मी व आरआरएफ मेरठ बटालियन की एक प्लाटून वहां मौजूद थी। वह लोगों को रोकने या शांत करने या समझाने के बजाय मूकदर्शक बनकर देखती रही। एक तरफ इनकी लापरवाही से पुलिस चौकी में तैनात सिपाही फंसकर रह गए और दूसरी ओर उपद्रवियों ने जमकर फायरिंग की। तारिक सहित कई लोग फायरिंग व पथराव में जख्मी हो गए। इस दौरान चीखते-चिल्लाते रहे, मगर यह प्लाटून मदद को आगे नहीं आई। किसी तरह पुलिस चौकी में फंसे पुलिसकर्मियों ने थाने में सूचना दी। तब यहां से अधिकारी दौड़कर गए और वहां स्थिति को नियंत्रित किया गया।
इस मामले में चौकी इंचार्ज को दोषी मानते हुए एसएसपी ने उन्हें पहले निलंबित कर दिया। वहीं अब सीसीटीवी के साक्ष्यों को देखकर आरआरएफ प्लाटून के खिलाफ रिपोर्ट मेरठ स्थित बटालियन मुख्यालय भेजी है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि सीसीटीवी देखकर वह प्लाटून में शामिल कर्मचारियों की जांच कराकर उन पर विभागीय कार्रवाई करें। एसएसपी मुनिराज जी ने इस तरह की रिपोर्ट भेजे जाने की पुष्टि की है। कहा है कि साक्ष्य भी भेजे हैं, ताकि बटालियन में जांच के बाद स्टाफ पर कार्रवाई हो सके।
तारिक के मुकदमे के अन्य आरोपी सरेंडर के फेर में
इधर, तारिक को गोली मारने की घटना के दो अन्य नामजद त्रिलोकी व सुरेंद्र को भी पुलिस खोज रही है। उन्हें लग रहा है कि जब विनय को पुलिस ने नहीं छोड़ा तो उन्हें भी पुलिस कभी भी जेल भेज सकती है। इसे लेकर दोनों सरेंडर करने की तैयारी में है। पुलिस स्तर से भी निगरानी रखी जा रही है।