ट्रेन से दबोचे दो आरोपी
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बाहर आए तो पता चला, दो अंदर ही रह गए
दो आरोपियों को पकड़ने के बाद करीब 40 जवानों की टीम स्टेशन के मुख्य द्वार की ओर बढ़ने लगी, जहां 12 पुलिस वाहन पहले से खड़े थे। तभी पीछे से आवाज आई, ''ये दो नहीं, चार हैं।'' यह सुनते ही पूरी टीम दो हिस्सों में बंट गई। एक टीम पकड़े गए आरोपियों को लेकर बाहर की ओर बढ़ी, जबकि दूसरी टीम तुरंत वापस ट्रेन की ओर दौड़ पड़ी। लेकिन तब तक ट्रेन ने सायरन दे दिया था और धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म छोड़ने लगी थी।
ट्रेन चलते देख एक अधिकारी ने दरोगा से जोर से कहा, ''चढ़ जा ऊपर... आगे देखेंगे।'' पहले दरोगा कुछ समझ नहीं पाए, फिर आदेश दोहराए जाने पर वह तुरंत एस-7 कोच में चढ़ गए। ट्रेन प्लेटफॉर्म से निकल चुकी थी और इसी बीच गाजियाबाद स्टेशन को वायरलेस पर अलर्ट भेज दिया गया। करीब दो घंटे बाद रात चार बजकर 20 मिनट पर सूचना मिली कि गाजियाबाद में बाकी दो आरोपी भी पकड़ लिए गए हैं। बृहस्पतिवार सुबह उन्नाव पुलिस की टीम अलीगढ़ और गाजियाबाद पहुंची और चारों आरोपियों को अपने कब्जे में लेकर रवाना हो गई।
35 साल की नौकरी में पहली बार देखा ऐसा ऑपरेशन
रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था सामान्य तौर पर जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल के अधीन रहती है। स्थानीय पुलिस का इस तरह बड़े स्तर पर स्टेशन के अंदर उतरना बेहद कम देखने को मिलता है। अलीगढ़ जंक्शन के एक कर्मचारी ने बताया, ''35 साल की नौकरी में पहली बार स्थानीय पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ को इतनी बड़ी संख्या में संयुक्त कार्रवाई करते देखा है। स्टेशन के अंदर जितनी पुलिस थी, उससे ज्यादा बाहर मुख्य द्वार पर खड़ी थी। पूरा स्टेशन रात में छावनी में बदल गया था। ऐसा ऑपरेशन पहले कभी नहीं देखा।''