इस मुकदमे में कुल 12 गवाह पेश किए गए। जिसमें मृत बच्चे के माता-पिता, मामा, निर्माण कर रहा राज मिस्त्री, तीन अन्य इलाके के लोग शामिल रहे। इसके अलावा पुलिस के गवाह व पोस्मार्टम करने वाले चिकित्सक शामिल रहे। मगर चार्जशीट में शामिल परिवार या मोहल्ले का कोई गवाह हत्या को साबित नहीं कर सका।
इन बिंदुओं पर अदालत में पुलिस कहानी पलटी
पुलिस चार्जशीट में मृत बच्चे के माता-पिता ने आरोपियों द्वारा खुद घर पर आकर हत्या करना स्वीकारा है। मगर अदालत में गवाही के समय दोनों ने यह कहा है कि उन्होंने दोनों को पहली बार पुलिस थाने में पकड़कर जेल भेजे जाते समय ही देखा गया। इससे उनके बयान में विरोधाभास स्पष्ट हुआ। इसी तरह मामा ने यहां तक कहा कि उसे नहीं पता कि कोई उनके घर आया था। इस तरह अदालत ने उसे पक्षद्रोही साबित किया। मां ने किसी आशू नाम के व्यक्ति द्वारा हत्या करते देखे जाने का बयान पुलिस को व अदालत में दिया। मगर पुलिस ने उसे गवाह के रूप में पेश नहीं किया। इस तरह गवाही सफल नहीं रही।
परिस्थितियों-कारण पर भी अदालत की टिप्पणी
घटना के कारण व परिस्थिति जन्य साक्ष्यों को लेकर अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि बली सरीखी कोई परिस्थिति, कोई माल बरामदगी मुकदमे में नहीं। न हत्या करने के कारण को लेकर कोई साक्ष्य पेश किया गया है। इस पर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस ने सिर्फ खुलासे के गरज से कहानी बनाकर खड़ी कर दी है। जिसके बाद इन्हें बरी किया गया।