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Aligarh: 11 वर्ष पहले 12 साल के बालक की दी गई बली, नहीं चली पुलिस की कहानी, आरोपों से दो सगे भाई बरी

Tue, 29 Jul 2025 04:33 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

घटना के कारण व परिस्थिति जन्य साक्ष्यों को लेकर अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि बली सरीखी कोई परिस्थिति, कोई माल बरामदगी मुकदमे में नहीं। न हत्या करने के कारण को लेकर कोई साक्ष्य पेश किया गया है। इस पर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस ने सिर्फ खुलासे के गरज से कहानी बनाकर खड़ी कर दी है। जिसके बाद इन्हें बरी किया गया।
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कोर्ट आदेश - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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अलीगढ़ महानगर के कोतवाली क्षेत्र के बाबरी मंडी में 11 वर्ष पहले 12 वर्षीय बालक जाकिर उर्फ शाकिर की बली के लिए हत्या की पुलिस कहानी अदालत में नहीं ठहर सकी। अदालत ने मामले में 15 माह की पुलिस विवेचना के बाद आरोपी बनाए गए दो सगे भाइयों को कमजोर साक्ष्यों के चलते अब आकर बरी कर दिया। यह निर्णय एडीजे तीन की अदालत से सुनाया गया है।

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घटनाक्रम 11 मार्च 2014 की सुबह का है। बाबरी मंडी पठानान मोहल्ला में सासनी गेट पठानान मोहल्ला के इमरान ने एक पुराना मकान खरीदा था। जिसमें नए सिरे से निर्माण कार्य चल रहा था। घटना वाली सुबह इमरान का भाई शाहजेब जब निर्माणाधीन मकान पर पहुंचा तो वहां एक बच्चे का शव मिला। जिसकी गर्दन आधी कटी पड़ी थी। पास में ही एक छुरी पड़ी थी। इस सूचना पर कोतवाली पुलिस पहुंच गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मकान स्वामी इमरान की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। इसी बीच शव की पहचान इसी मोहल्ले के साबिर ने अपने बच्चे जाकिर उर्फ शाकिर के शव के रूप में की। साबिर ने दूसरी यह तहरीर दी कि उनका बच्चा सुबह शौंच के लिए गया था। फिर नहीं आया। बाद में उन्हें पता चला कि किसी बच्चे का शव मिला है। उसकी पहचान उन्होंने अपने बेटे के शव के रूप में की।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर 15 माह तक विवेचना की। मगर किसी तरह के साक्ष्य नहीं मिले। घटना के 15 माह बाद 3 जून 2015 को साबिर व उसकी पत्नी परवीन ने पुलिस को आकर बताया कि जिस मकान में उनके बच्चे का शव मिला था। उस मकान के स्वामी इमरान व उसके छोटे भाई शाहजेब ने उनके घर आकर यह स्वीकारा कि उनसे गलती हो गई है। उन्हें किसी बाबा ने यह बताया था कि जिस मकान का तुम निर्माण करा रहे हो। उसमें कोयले के रूप में सोना दबा है। अगर किसी बच्चे की बली दे दोगे तो वह सोना बन जाएगा। इसी लालच में उन्होंने बच्चे की हत्या कर दी है।
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बच्चे के मां-बाप के इसी बयान के आधार पर पुलिस ने दोनों भाइयों पर ही हत्या का खुलासा करते हुए दोनों को जेल भेज दिया। बाद में चार्जशीट दायर कर दी। इस मुकदमे का ट्रायल अदालत में चला तो न तो गवाही में हत्या का कोई चश्मदीद साक्षी सामने आया। न यह साबित हो पाया कि दोनों आरोपी भाइयों ने दंपती के घर जाकर अपना आरोप स्वीकारा था। न पुलिस कहानी में हत्या का सही कारण साबित हो सका। इसी आधार पर अदालत ने पुलिस की कमजोर कहानी के सहारे दोनों भाइयों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया।

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गवाह साबित नहीं कर सके पुलिस की कहानी

इस मुकदमे में कुल 12 गवाह पेश किए गए। जिसमें मृत बच्चे के माता-पिता, मामा, निर्माण कर रहा राज मिस्त्री, तीन अन्य इलाके के लोग शामिल रहे। इसके अलावा पुलिस के गवाह व पोस्मार्टम करने वाले चिकित्सक शामिल रहे। मगर चार्जशीट में शामिल परिवार या मोहल्ले का कोई गवाह हत्या को साबित नहीं कर सका।

इन बिंदुओं पर अदालत में पुलिस कहानी पलटी
पुलिस चार्जशीट में मृत बच्चे के माता-पिता ने आरोपियों द्वारा खुद घर पर आकर हत्या करना स्वीकारा है। मगर अदालत में गवाही के समय दोनों ने यह कहा है कि उन्होंने दोनों को पहली बार पुलिस थाने में पकड़कर जेल भेजे जाते समय ही देखा गया। इससे उनके बयान में विरोधाभास स्पष्ट हुआ। इसी तरह मामा ने यहां तक कहा कि उसे नहीं पता कि कोई उनके घर आया था। इस तरह अदालत ने उसे पक्षद्रोही साबित किया। मां ने किसी आशू नाम के व्यक्ति द्वारा हत्या करते देखे जाने का बयान पुलिस को व अदालत में दिया। मगर पुलिस ने उसे गवाह के रूप में पेश नहीं किया। इस तरह गवाही सफल नहीं रही।

परिस्थितियों-कारण पर भी अदालत की टिप्पणी
घटना के कारण व परिस्थिति जन्य साक्ष्यों को लेकर अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि बली सरीखी कोई परिस्थिति, कोई माल बरामदगी मुकदमे में नहीं। न हत्या करने के कारण को लेकर कोई साक्ष्य पेश किया गया है। इस पर बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस ने सिर्फ खुलासे के गरज से कहानी बनाकर खड़ी कर दी है। जिसके बाद इन्हें बरी किया गया।
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