तीन प्रजातियों का बसेरा
शेखा झील में तीन प्रमुख प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। इनमें भारतीय फ्लैपशेल कछुआ (लिसेमिस पंक्टाटा), गंगा सॉफ्टशेल कछुआ (निल्सोनिया गैंगेटिका) और काला तालाब कछुआ (जियोक्लेमिस हैमिल्टोनी) शामिल हैं। गंगा सॉफ्टशेल कछुआ आईयूसीएन रेड लिस्ट में लुप्तप्राय श्रेणी में रखा गया है और इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत उच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। काला तालाब कछुआ अपनी चित्तीदार बनावट के कारण आसानी से पहचाना जाता है।
गंगा में छोड़े गए चार हजार कछुए
सांकरा गंगा तट के निकट गांव किरतौली स्थित कछुआ संरक्षण केंद्र से अब तक करीब चार हजार कछुए गंगा में छोड़े जा चुके हैं। इनमें इंडियन टेंट टर्टल, इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल और इंडियन रूफ्ड टर्टल प्रजातियां शामिल हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सहयोग से संचालित इस केंद्र को नमामि गंगे अभियान से भी जोड़ा गया है। नमामि गंगे से जुड़े ज्ञानेश शर्मा बताते हैं कि स्थानीय जैव विविधता को मजबूत करने के लिए भविष्य में कछुओं की संख्या और बढ़ाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। शेखा झील में शांत पानी के नीचे चल रही यह दुनिया केवल कछुओं की कहानी नहीं, बल्कि उस जैव विविधता की पहचान भी है, जिसे बचाए रखना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
ये भी जानें
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- झील में तीन प्रजातियों के कछुओं की मौजूदगी
- मगरमच्छ और कछुओं के सहअस्तित्व से बना जैव संतुलन
- सांकरा से गंगा में छोड़े गए चार हजार से अधिक कछुए
- जिले में कछुओं की संख्या पांच हजार के करीब