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एनेस्थीसिया दिए बगैर दिमागी ट्यूमर का ऑपरेशन

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दिमागी सर्जरी करने के बाद अपनी टीम के साथ खुशी जाहिर करते डॉ. रहमान।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने राजपाल (54) को एनेस्थीसिया दिए बगैर ही उनके मस्तिष्क से खतरनाक ट्यूमर निकालने में कामयाबी हासिल की है। यह ऑपरेशन अत्यधिक चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि ट्यूमर मस्तिष्क के उस भाग के पास था, जो संवाद को नियंत्रित करता है और भाषा को समझने की क्षमता प्रदान करता है। इस ऑपरेशन को चिकित्सा क्षेत्र में ‘अवैक क्रेनियोटॉमी’ कहा जाता है।
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न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एम फखरुल हुदा ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कासगंज के रहने वाले राजपाल को होश में रखा गया और मस्तिष्क के उस हिस्से को सुन्न किया गया, जहां ट्यूमर था। मस्तिष्क की गतिविधि पर दृष्टि रखने के लिए डॉक्टर उससे बातचीत करते रहे। न्यूरो सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमन मोहन शर्मा ने डॉ. ताबिश खान के साथ मिलकर इस दुर्लभ शल्य चिकित्सा को सफल अंजाम दिया। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को बेहोश किए बिना ऑपरेशन से मस्तिष्क के उन हिस्सों को नुकसान पहुंचने से बचाया जा सकता है, जो देखने, हिलने-डुलने व बातचीत को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्यूमर राजपाल के सिर के बायें हिस्से में था, जो बातचीत को नियंत्रित करता है। राजपाल के ट्यूमर का ऑपरेशन सफल रहा। खुले सिर को बंद किए जाने के बाद राजपाल लगातार बातचीत करते व सुनते रहे।
डॉक्टरों के मुताबिक, राजपाल को जल्द ही चिकित्सालय से छुट्टी दे दी जाएगी। ट्यूमर के खतरे को लेकर कई चिकित्सालयों के डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन से मना कर दिया था। न्यूरो एनेस्थीसिया की विशेषज्ञ प्रोफेसर शहला हलीम, डॉ. उबैद ए सिद्दीकी, डॉ. हस्सान ने बताया कि इस बात पर उनका जोर था कि रोगी को दर्द न होने पाए। ऑपरेशन दल में डॉ. परवेज, डॉ. उरूज, डॉ. प्राची भी शामिल थीं। मेडिसिन संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर सतीश चंद्र शर्मा ने इस सफल ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों को बधाई दी है।
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